
▪️मुंबई। दुनियाभर में किसी से मिलने पर हाथ मिलाने यानी हैंडशेक की परंपरा है, लेकिन भारतीय संस्कृति में अभिवादन के लिए ‘नमस्कार’ किया जाता है। दावा किया जाता है कि दोनों हाथ जोड़ने की इस मुद्रा के पीछे न्यूरोसाइंस से जुड़ा एक रोचक पहलू है। जब हम दोनों हथेलियों को आपस में जोड़ते हैं, तो शरीर की दोनों तरफ की तंत्रिका गतिविधियां सक्रिय होती हैं और मस्तिष्क के बाएं तथा दाएं हिस्सों के बीच समन्वय बढ़ने की बात कही जाती है।
- मस्तिष्क की ‘क्रॉस-वायरिंग’ प्रणाली
मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में शरीर की एक तरफ का नियंत्रण मुख्य रूप से मस्तिष्क के विपरीत हिस्से से होता है। यानी मस्तिष्क का बायां हिस्सा शरीर के दाएं हिस्से और दायां हिस्सा बाएं हिस्से की गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
जब हम एक हाथ से किसी से हाथ मिलाते हैं, तो शरीर की एक तरफ की गतिविधि अधिक सक्रिय होती है। इसके विपरीत, नमस्कार करते समय दोनों हाथ एक साथ जुड़ते हैं। इससे शरीर के दोनों हिस्सों से मिलने वाले तंत्रिका संकेत मस्तिष्क तक पहुंचते हैं और दोनों हिस्सों के बीच समन्वय की प्रक्रिया सक्रिय होने की बात कही जाती है।
- ‘कॉर्पस कैलोसुम’ की भूमिका
मस्तिष्क के बाएं और दाएं गोलार्ध को जोड़ने वाली तंत्रिका-रेशों की एक बड़ी संरचना को ‘कॉर्पस कैलोसुम’ कहा जाता है। इसका काम दोनों गोलार्धों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करना है।
‘महाराष्ट्र टाइम्स’ के एक लेख के अनुसार, दोनों हथेलियों और उंगलियों को आपस में जोड़ने से तंत्रिका संकेत सक्रिय होते हैं और इससे दोनों मस्तिष्कीय गोलार्धों के बीच बेहतर तालमेल बनने की बात कही जाती है। इसे ‘ब्रेन सिंक्रोनाइजेशन’ से जोड़ा गया है।
- तर्क और भावनाओं के बीच संतुलन
लेख में मस्तिष्क के बाएं हिस्से को तर्क, गणना, विश्लेषण और भाषा से तथा दाएं हिस्से को भावनाओं, रचनात्मकता और कलात्मक सोच से जोड़ा गया है। नमस्कार या ‘अंजलि मुद्रा’ में दोनों हाथ जोड़ने से इन दोनों पक्षों के बीच संतुलन और समन्वय बढ़ने का दावा किया गया है।
इसी वजह से भोजन से पहले, किसी महत्वपूर्ण काम से पहले या किसी व्यक्ति का अभिवादन करते समय दोनों हाथ जोड़ने को मानसिक शांति और कृतज्ञता की भावना से जोड़ा जाता है।
- उंगलियों के स्पर्श का असर
हथेलियों और उंगलियों में बड़ी संख्या में संवेदनशील तंत्रिका अंत होते हैं। दोनों हथेलियों को जोड़ने और हल्का दबाव देने से तंत्रिका तंत्र को संकेत मिलते हैं। लेख में इस प्रक्रिया को शरीर के विभिन्न हिस्सों से जुड़े एक्यूप्रेशर बिंदुओं की सक्रियता तथा पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम से भी जोड़ा गया है।
इस प्रणाली का संबंध शरीर को आराम की स्थिति में लाने और पाचन जैसी प्रक्रियाओं से है। इसलिए लेख में भोजन से पहले या किसी महत्वपूर्ण गतिविधि से पहले नमस्कार की मुद्रा अपनाने को उपयोगी बताया गया है।
