▪️77 लाख से अधिक किसानों की मदद में अहम भूमिका, ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए जरूरतमंदों को मिला सहारा
- मुंबई। अभिनेता नाना पाटेकर ने अपने अभिनय के साथ सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी अलग पहचान बनाई। किसानों की आत्महत्या से जुड़ी एक टीवी रिपोर्ट ने उनकी सोच बदल दी। डेढ़ करोड़ रुपये की लग्जरी कार खरीदने के लिए बचाई गई रकम को उन्होंने किसानों की मदद में लगाने का फैसला किया। उनकी यही पहल आगे चलकर बड़े सामाजिक अभियान में बदल गई।

वर्ष 2015 में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में किसान आत्महत्या और फसल बर्बादी का संकट गहरा रहा था। इसी दौरान नाना ने टीवी पर एक किसान परिवार की पीड़ा देखी। परिवार की बेबसी ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने एक हजार किसानों को 15-15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया। बाद में किसान परिवारों और विधवाओं से मुलाकात के बाद उन्हें महसूस हुआ कि इस समस्या के समाधान के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं।
इसके बाद नाना पाटेकर ने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर ‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना की। इस पहल को आम लोगों का व्यापक सहयोग मिला। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती दो महीनों में करीब 60 करोड़ रुपये जुटाए गए।
फाउंडेशन के माध्यम से 77 लाख से अधिक किसानों, आपदा प्रभावित 51 हजार परिवारों और करीब पांच हजार विधवाओं की सहायता की गई। संगठन ने जरूरतमंद परिवारों और जवानों के परिजनों की मदद के लिए भी काम किया।
नाना पाटेकर का मानना था कि जरूरतमंदों की सेवा से मिलने वाला संतोष किसी पुरस्कार या धन से बड़ा है। उनकी यह पहल बताती है कि संवेदनशीलता और सही समय पर उठाया गया एक कदम हजारों लोगों के जीवन में उम्मीद जगा सकता है।
