- एक साल में लाखों लोग हो चुके हैं लापता
- महाराष्ट्र, दिल्ली, यूपी, मध्यप्रदेश और राजस्थान में लोग हो रहे गायब

●मुंबई-नई दिल्ली
भारत में लापता हो रहे लोगों का मुद्दा बीते एक साल में और अधिक गंभीर रूप में सामने आया है। उपलब्ध सरकारी व मीडिया रिपोर्टों के आधार पर यह स्पष्ट है कि दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में लापता मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासतौर पर महिलाएं, किशोरियां और बच्चे इस संकट का सबसे बड़ा शिकार बन रहे हैं।
महाराष्ट्र में पिछले एक साल के दौरान 50 से 60 हजार के बीच लोगों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है। अकेले 2025 के शुरुआती पांच महीनों में 30 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए थे, जबकि साल के बाकी हिस्से में भी यह सिलसिला जारी रहा। मुंबई और आसपास के महानगर क्षेत्र इन मामलों में सबसे आगे हैं, जहां रोज़गार, पलायन और संगठित अपराध बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
राजधानी दिल्ली में बीते एक साल के भीतर स्थिति बेहद चिंताजनक रही। वर्ष 2025 में दिल्ली में 23 हजार से अधिक लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई। इनमें लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं और लड़कियां थीं। यही नहीं, जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में ही 800 से ज्यादा लोग लापता हुए, जिससे औसतन रोज 50 से अधिक लोगों के गायब होने का आंकड़ा सामने आया। इनमें सैकड़ों नाबालिग शामिल हैं।
देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश भी इस सूची में शीर्ष पर बना हुआ है। एनसीआरबी के रुझानों के अनुसार पिछले एक साल में यूपी में 60 हजार से अधिक लोग लापता बताए गए। इनमें महिलाओं और किशोरियों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक है। कई मामलों में पीड़ितों का महीनों, यहां तक कि वर्षों तक पता नहीं चल पाता।
मध्यप्रदेश में भी बीते एक साल के दौरान 40 हजार के आसपास लापता मामलों की रिपोर्ट दर्ज हुई। राज्य को मानव तस्करी के ट्रांजिट रूट के रूप में भी देखा जाता है, जिससे महिलाओं और बच्चों के लापता होने के मामलों में अतिरिक्त चिंता पैदा होती है। आदिवासी और दूरदराज़ इलाकों में निगरानी की कमी समस्या को और जटिल बनाती है।
इसी तरह राजस्थान में पिछले एक साल में 25 से 30 हजार लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। सीमावर्ती जिलों और बड़े शहरों में दर्ज कई मामले लंबे समय तक अनसुलझे रहते हैं, जिनमें नाबालिग लड़कियों की संख्या उल्लेखनीय है।
राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो बीते एक साल में देशभर में करीब 4 से 5 लाख लोग लापता रिपोर्ट किए गए। हालांकि इनमें से बड़ी संख्या बाद में ट्रेस कर ली जाती है, फिर भी लाखों परिवार आज भी अपनों की राह देख रहे हैं। स्पष्ट है कि ये आंकड़े केवल संख्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक सतर्कता, त्वरित जांच और सामाजिक जिम्मेदारी की कठोर परीक्षा हैं।
