▪️नए अध्ययन ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की उत्सुकता
- मुंबई
क्या मिल्की वे (आकाशगंगा) में दिखाई देने वाले कुछ बेहद ठंडे तारे वास्तव में तारे नहीं, बल्कि किसी अत्याधुनिक एलियन सभ्यता द्वारा बनाई गई विशाल ऊर्जा-संग्रह संरचनाएं हो सकते हैं? एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने इस संभावना को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि वैज्ञानिकों ने इसे केवल एक परिकल्पना बताया है, लेकिन इसे जांचने के लिए नई दिशा जरूर मिली है।

अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ अर्कांसस के शोधकर्ता अमीरनेज़ाम अमीरी के अध्ययन के अनुसार, यदि कोई अत्यधिक विकसित सभ्यता अपने तारे की ऊर्जा का बड़े पैमाने पर उपयोग करना चाहे, तो वह उसके चारों ओर लाखों सौर ऊर्जा संग्राहकों का एक समूह बना सकती है। इसे ‘डायसन स्वॉर्म’ या ‘डायसन मेगास्ट्रक्चर’ कहा जाता है। ऐसी संरचनाएं तारे की ऊर्जा तो ग्रहण करेंगी, लेकिन अतिरिक्त ऊष्मा को इन्फ्रारेड (अवरक्त) विकिरण के रूप में बाहर छोड़ेंगी। यही संकेत वैज्ञानिक खोजने की कोशिश कर रहे हैं।
शोध में बताया गया है कि लाल बौने (Red Dwarf) और श्वेत बौने (White Dwarf) तारे ऐसी काल्पनिक संरचनाओं के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। यदि इनके आसपास असामान्य रूप से कम तापमान और विशिष्ट इन्फ्रारेड संकेत मिलते हैं, तो वे आगे की जांच के लिए महत्वपूर्ण उम्मीदवार हो सकते हैं।
हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक एलियन तकनीक या डायसन मेगास्ट्रक्चर का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है। यह अध्ययन केवल यह बताता है कि भविष्य में ऐसी संभावित संरचनाओं की पहचान किन संकेतों के आधार पर की जा सकती है। यदि ऐसे असामान्य संकेत मिलते हैं, तो वे ब्रह्मांड में बुद्धिमान जीवन की खोज के लिए एक महत्वपूर्ण सुराग साबित हो सकते हैं।
