
▪️ सूर्यकांत उपाध्याय
एक परिवार के बड़े बेटे का पास के गांव की एक लड़की से रिश्ता तय हुआ। विवाह की तारीख नजदीक आई तो लड़की के पिता ने अजीब शर्त रख दी कि बारात में कोई बुजुर्ग नहीं आएगा। यदि कोई बुजुर्ग बारात में आया तो वे बेटी की विदाई नहीं करेंगे।
शर्त सुनकर लड़के वाले परेशान हो गए। विवाह में केवल दो दिन बाकी थे। सभी सोच रहे थे कि बुजुर्गों के बिना विवाह कैसे होगा? आखिरकार लड़के के पिता ने भारी मन से तय किया कि बारात बिना बुजुर्गों के जाएगी।
लेकिन लड़के के ताऊजी इसके लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा, ‘बड़ों के बिना विवाह कैसे हो सकता है? मैं तो शादी में जरूर जाऊंगा।’ परिवार ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। अंततः उन्हें कपड़ों की गठरी के बीच छिपाकर बारात में ले जाने का फैसला हुआ।
बारात पहुंची तो लड़की के पिता ने एक और शर्त रख दी। गांव के बाहर बहने वाली नदी में पानी की जगह दूध की धारा बहानी होगी, तभी विवाह होगा। यह सुनकर सभी के होश उड़ गए। इतनी बड़ी नदी में दूध बहाना असंभव था। लड़के वालों ने बारात वापस ले जाने का फैसला किया।
यह सुनते ही छिपे हुए ताऊजी बाहर आए और बोले, ‘इतनी-सी बात के लिए बारात वापस क्यों ले जा रहे हो? लड़की के पिता से कहो कि हम नदी में दूध बहाने को तैयार हैं, लेकिन पहले नदी का पानी खाली करवाएं।’
यह बात सुनते ही सभी समझ गए कि ताऊजी की सूझबूझ ने समस्या का समाधान कर दिया है। लड़की के पिता मुस्कराए और बोले, ‘अब मुझे विश्वास हो गया कि बारात में बुजुर्ग जरूर आए हैं। विवाह सभी बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से ही होगा।’
- शिक्षा : आधुनिकता की दौड़ में बुजुर्गों के अनुभव और मार्गदर्शन को कभी बेकार नहीं समझना चाहिए।
