▪️ सूर्यकांत उपाध्याय

भगवान श्रीकृष्ण की अतिप्रिय राधा जी के जन्म और उनके माता-पिता को लेकर पुराणों तथा लोकपरंपराओं में कई कथाएं प्रचलित हैं। विष्णु, पद्म और ब्रह्मवैवर्त पुराण में राधा जी का उल्लेख मिलता है। उन्हें वृषभानु और कीर्ति की पुत्री तथा वृषभानु कुमारी कहा जाता है। उनके जन्म को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं।
- माता-पिता और जन्मस्थान
पद्म पुराण की मान्यता के अनुसार राधा जी वृषभानु नामक वैश्य गोप की पुत्री थीं और उनकी माता का नाम कीर्ति था। वृषभानु का निवास बरसाना माना जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार राधा जी का जन्म यमुना के निकट रावल ग्राम में हुआ और बाद में उनके पिता बरसाना में बस गए। हालांकि, जन्मस्थान को लेकर विभिन्न मत प्रचलित हैं। - राधा जी के प्राकट्य की कथा
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, वृषभानु जी यज्ञभूमि की सफाई कर रहे थे। तभी उन्हें भूमि से एक कन्या प्राप्त हुई। उन्होंने उस कन्या को अपनी पुत्री मानकर उसका पालन-पोषण किया। एक अन्य मान्यता में कहा गया है कि वृषभानु जी को सरोवर में खिले कमल पर एक बालिका मिली, जिसे उन्होंने अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया। यही बालिका आगे चलकर राधा के नाम से प्रसिद्ध हुई। कहा जाता है कि बालिका राधा की आंखें बंद थीं। एक दिन नंद बाबा और यशोदा जी श्रीकृष्ण को लेकर वृषभानु के घर आए। जैसे ही राधा जी की दृष्टि श्रीकृष्ण पर पड़ी, उन्होंने पहली बार अपनी आंखें खोलीं। - पौराणिक मान्यता
एक अन्य कथा में राजा सुचंद्र और कलावती द्वारा वर्षों तक तप करने और ब्रह्मा जी से राधा को पुत्री रूप में प्राप्त करने का वरदान मांगने का वर्णन मिलता है। द्वापर युग में यही दोनों वृषभानु और कीर्ति के रूप में जन्मे और उनके घर राधा जी का प्राकट्य हुआ। - गोलोक की कथा
ब्रह्मवैवर्त पुराण की एक कथा के अनुसार राधा जी और श्रीकृष्ण गोलोक में साथ रहते थे। श्रीदामा के श्राप के कारण राधा को पृथ्वी पर मनुष्य रूप में जन्म लेना पड़ा और कृष्ण-वियोग सहना पड़ा। श्रीकृष्ण ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे सदैव उनके साथ रहेंगे। - रायाण से विवाह की मान्यता
ब्रह्मवैवर्त पुराण में राधा जी के रायाण नामक वैश्य से संबंध का भी उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार राधा जी ने अपनी छाया को घर में स्थापित कर दिया और स्वयं अंतर्धान हो गईं। उसी छाया का रायाण से विवाह हुआ। विभिन्न परंपराओं में इस कथा की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं।
इस प्रकार राधा जी के जन्म, प्राकट्य, जन्मस्थान और विवाह को लेकर अनेक धार्मिक एवं लोकमान्यताएं प्रचलित हैं।
