
▪️मुंबई। क्या महज 20 सेकंड की आवाज से टाइप-2 डायबिटीज के खतरे का अनुमान लगाया जा सकता है? नए शोध में विकसित एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल ने इस दिशा में उम्मीद जगाई है। यह तकनीक व्यक्ति की आवाज में होने वाले बेहद सूक्ष्म बदलावों का विश्लेषण कर डायबिटीज के संभावित जोखिम का आकलन करती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज से आवाज में भारीपन या खुरदरापन बढ़ने और बोलते समय सांस तथा आवाज पर नियंत्रण में बदलाव जैसे संकेत जुड़े हो सकते हैं। AI मॉडल को ब्रिटेन और अमेरिका के 21,129 लोगों के 63,283 वॉयस सैंपल से प्रशिक्षित किया गया। इसके बाद ब्रिटेन के 7,319 वयस्कों पर 20 सेकंड की रिकॉर्डिंग के जरिए इसका परीक्षण किया गया।
मॉडल की तुलना जब HbA1c जांच के परिणामों से की गई तो 801 लोगों के समूह में इसने डायबिटीज वाले करीब 82 प्रतिशत लोगों की पहचान की। हालांकि, बिना डायबिटीज वाले करीब 47 प्रतिशत लोगों को भी इसने संभावित जोखिम वाला बताया। इसका मतलब है कि तकनीक अभी रक्त जांच का विकल्प नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में इसका इस्तेमाल प्राथमिक स्क्रीनिंग के तौर पर किया जा सकता है। व्यक्ति फोन या ऐप के जरिए आवाज की छोटी रिकॉर्डिंग दे सकता है और अधिक जोखिम सामने आने पर उसे HbA1c जैसी पारंपरिक जांच कराने की सलाह दी जा सकती है।
शोध अभी शुरुआती चरण में है और आगे अलग-अलग आबादी तथा चिकित्सकीय परिस्थितियों में इसकी पुष्टि जरूरी है। शोधकर्ताओं ने भी स्पष्ट किया है कि यह तकनीक फिलहाल रक्त जांच की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि संभावित जोखिम की पहचान में मदद करने के लिए है।
