
▪️मुंबई। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कुछ मुंबईकरों को चुनाव आयोग की ओर से नोटिस मिलने से दस्तावेजों को लेकर नई प्रक्रिया शुरू हो गई है। नोटिस में मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र के बीच 15 वर्ष से कम अंतर का उल्लेख करते हुए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। इसके बाद संबंधित मतदाताओं के साथ बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के सामने भी कई सवाल और व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ रही हैं।
एसआईआर के दौरान कई मतदाताओं ने 2002 की मतदाता सूची के आधार पर अपने मतदान केंद्र, विधानसभा क्षेत्र और भाग क्रमांक की जानकारी उपलब्ध कराई थी। कुछ नागरिकों को इसके बावजूद नोटिस मिलने पर वे प्रक्रिया के आधार और दस्तावेजों की आवश्यकता को लेकर स्पष्टीकरण चाहते हैं। उनका कहना है कि 2002 की मतदाता सूची में माता-पिता की उम्र या पहचान से जुड़े सभी विवरण उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में उम्र के अंतर का निर्धारण किस उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किया गया, यह जानना उनके लिए महत्वपूर्ण है।
नोटिस में जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, सरकारी पहचानपत्र और शैक्षणिक प्रमाणपत्र सहित विभिन्न दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। कुछ नागरिकों ने यह भी सवाल उठाया है कि जन्म प्रमाणपत्र या स्कूल प्रमाणपत्र पर फोटो नहीं होने की स्थिति में पहचान का सत्यापन किस अतिरिक्त दस्तावेज के माध्यम से किया जाएगा।
चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत बीएलओ संबंधित मतदाताओं को नोटिस उपलब्ध करा रहे हैं। बीएलओ का कहना है कि वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्य कर रहे हैं। वहीं, नागरिकों की अपेक्षा है कि दस्तावेजों की आवश्यकता, सत्यापन की प्रक्रिया और उम्र संबंधी आपत्तियों के आधार को स्पष्ट रूप से बताया जाए, ताकि उन्हें बार-बार दस्तावेज जुटाने या अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की स्थिति का सामना न करना पड़े।
फिलहाल, नोटिस पाने वाले मतदाताओं के बीच प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण की मांग बढ़ रही है।
