▪️सूर्यकांत उपाध्याय

एक बार भौतिक विज्ञान की कक्षा में शिक्षक ने विद्यार्थियों से पूछा, “कार में ब्रेक क्यों लगाए जाते हैं?”
एक छात्र ने कहा, “सर, कार रोकने के लिए।” दूसरे ने जवाब दिया, “गति कम करने और उसे नियंत्रित करने के लिए।” किसी ने कहा, “टक्कर से बचने के लिए।”
जब कई छात्रों ने लगभग यही उत्तर दिए तो शिक्षक मुस्कुराए और बोले, “आप सभी के उत्तर सही हैं, लेकिन मैं इसे थोड़ा अलग तरीके से देखता हूं। कार में ब्रेक हमें तेज चलने का साहस देते हैं।”
कक्षा में सन्नाटा छा गया। शिक्षक ने समझाया, “कल्पना कीजिए कि कार में ब्रेक ही नहीं हैं। क्या हम उसे तेज गति से चलाने का जोखिम उठाएंगे? शायद नहीं। दरअसल, ब्रेक का भरोसा ही हमें तेजी से आगे बढ़ने और सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचने का आत्मविश्वास देता है।”
विद्यार्थी पहली बार ब्रेक को इस नजरिए से देख रहे थे।
हमारे जीवन में भी ऐसे कई ‘ब्रेक’ आते हैं। माता-पिता, शिक्षक, मित्र और शुभचिंतक जब हमारी योजनाओं पर सवाल उठाते हैं या कठिन समय में हमें रुककर सोचने की सलाह देते हैं, तो हमें लगता है कि वे हमारी गति रोक रहे हैं। लेकिन कई बार यही लोग और परिस्थितियां हमें बड़े जोखिम से बचाती हैं और सही दिशा दिखाती हैं।
जीवन में कभी रुकना, पीछे हटना या अपनी योजना पर दोबारा विचार करना असफलता नहीं है। कई बार यही ठहराव हमें लंबी छलांग के लिए तैयार करता है।
• शिक्षा: जीवन के ‘ब्रेक’ हमें पीछे खींचने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित और सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए होते हैं। कठिन परिस्थितियों से गुजरकर हम अक्सर पहले से अधिक मजबूत बनकर उभरते हैं। इसलिए जीवन के हर ‘ब्रेक’ को बाधा नहीं, एक सीख और अवसर के रूप में देखना चाहिए।
