
- मुंबई। चीनी से बचने के लिए लोग अक्सर ‘जीरो शुगर’ या कम कैलोरी वाले पेय को बेहतर विकल्प मानते हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह हृदय के लिए सुरक्षित मानना उचित नहीं है। हालिया शोधों में कृत्रिम मिठास वाले पेय और हृदय तथा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध को लेकर चिंता जताई गई है।
2026 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में 37 अध्ययनों और करीब 36 लाख प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें अधिक मात्रा में कृत्रिम मिठास के सेवन और हृदय विफलता, स्ट्रोक, कोरोनरी आर्टरी डिजीज तथा हृदय संबंधी मृत्यु के बढ़े जोखिम के बीच संबंध पाया गया। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे अध्ययनों से सीधे यह साबित नहीं होता कि कृत्रिम मिठास ही इन बीमारियों का कारण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कम कैलोरी वाले पेय सामान्य चीनी वाले पेय की तुलना में कुछ परिस्थितियों में बेहतर विकल्प हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक इनके सेवन के प्रभावों को लेकर प्रमाण अभी निर्णायक नहीं हैं। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के 2026 के वैज्ञानिक वक्तव्य में भी पानी और बिना मिठास वाले पेय को दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
इसलिए केवल ‘जीरो शुगर’ लिखे होने के आधार पर किसी पेय को रोजाना पीने की आदत बनाना उचित नहीं है। पर्याप्त पानी, बिना चीनी वाली चाय या अन्य प्राकृतिक, बिना मिठास वाले पेय बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
