▪️सूर्यकांत उपाध्याय

एक राजा ने दो लोगों को मौत की सजा सुनाई। उनमें से एक जानता था कि राजा अपने घोड़े से बहुत प्यार करता है।
उसने राजा से कहा, “यदि मेरी जान बख्श दी जाए, तो मैं एक साल के भीतर आपके घोड़े को उड़ना सिखा दूँगा।”
यह सुनकर राजा खुश हो गया। उसने सोचा कि वह दुनिया के इकलौते उड़ने वाले घोड़े की सवारी कर सकेगा।
दूसरे कैदी ने अपने मित्र की ओर अविश्वास से देखा और कहा, “तुम जानते हो कि कोई भी घोड़ा उड़ नहीं सकता! फिर तुम्हारे मन में ऐसी मूर्खतापूर्ण बात आई कैसे? तुम तो बस अपनी मौत को एक साल के लिए टाल रहे हो।”
पहला कैदी बोला, “ऐसी बात नहीं है। दरअसल, मैंने खुद को बचने के चार मौके दिए हैं।
पहली बात, राजा एक साल के भीतर मर सकता है!
दूसरी बात, मैं खुद मर सकता हूँ!
तीसरी बात, घोड़ा मर सकता है!
और चौथी बात… हो सकता है कि मैं सचमुच घोड़े को उड़ना सिखा दूँ!”
- शिक्षा: हमें कभी भी विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी आशा नहीं छोड़नी चाहिए। समय के साथ परिस्थितियाँ बदल सकती हैं और असंभव दिखने वाली बात भी संभव हो सकती है।
