▪️सूर्यकांत उपाध्याय

दिनेश, संतोष, मनीष और प्रवीण ने एक ही स्कूल में एसएससी तक पढ़ाई की थी। परीक्षा के बाद चारों ने मुश्किल से 40 रुपये जुटाए और शहर के इकलौते लग्जरी होटल में चाय-नाश्ता करने पहुंचे। वहीं उन्होंने तय किया कि वे 50 साल बाद, 1 अप्रैल को इसी होटल में मिलेंगे और देखेंगे कि किसने जिंदगी में कितनी तरक्की की। उन्होंने यह भी तय किया कि जो सबसे बाद में आएगा, वही बिल चुकाएगा। उनकी बातें सुन रहा वेटर कालू भी बोला कि यदि वह तब तक वहां रहा, तो उनका इंतजार करेगा।
आगे की पढ़ाई के लिए चारों अलग-अलग हो गए। समय बीतता गया और पांच दशक गुजर गए। शहर बदल गया। होटल फाइव स्टार बन गया और वेटर कालू उसका मालिक, कालू सेठ बन चुका था।
तय दिन सबसे पहले दिनेश पहुंचा, जो अब तीन ज्वैलरी शोरूम का मालिक था। फिर संतोष आया, जो बड़ा बिल्डर बन चुका था। कुछ देर बाद मनीष भी पहुंचा, जो सफल व्यवसायी बन गया था। तीनों प्रवीण का इंतजार करते रहे। उसके संदेश आते रहे कि वे चाय-नाश्ता और खाना शुरू कर दें। आखिरकार बिल भी ऑनलाइन चुकाया जा चुका था।
रात आठ बजे एक युवक वहां पहुंचा। उसने बताया कि वह प्रवीण का बेटा रवि है। पिछले महीने गंभीर बीमारी के कारण उसके पिता का निधन हो गया था। प्रवीण को इस मिलन का बेसब्री से इंतजार था। उन्होंने बेटे से कहा था कि वह देर से पहुंचे, ताकि दोस्त पहले साथ बैठकर हंस-बोल सकें और उनकी मृत्यु की खबर से उनकी खुशी फीकी न पड़े।
रवि ने बताया कि उसके पिता शिक्षक बने थे और उसे पढ़ाकर कलेक्टर बनाया। आज वह इसी शहर का कलेक्टर है। यह सुनकर सभी भावुक हो गए। कालू सेठ ने प्रस्ताव रखा कि अब वे 50 साल नहीं बल्कि हर 50 दिन में मिलेंगे और पार्टी उसकी ओर से होगी।
- सीख: जिंदगी का कोई भरोसा नहीं। दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने के लिए वर्षों का इंतजार मत कीजिए। केवल सुप्रभात और शुभरात्रि के संदेश भेजना ही रिश्ते निभाना नहीं है। अवसर मिले तो अपनों से मिलिए, उन्हें गले लगाइए और साथ बिताए पलों का आनंद लीजिए।
