- मुंबई तक तेजी से पहुंचेंगे सेब और चेरी
- क्रिकेट में भी घाटी की नई पहचान

▪️दामोदर व्यास@श्रीगर से लौटकर
चिनाब रेल ब्रिज और उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) के पूरा होने से कश्मीर घाटी की देश के अन्य हिस्सों से रेल कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। इसका असर अब माल परिवहन पर भी दिखाई देने लगा है। सेब, चेरी, सूखे मेवे और अन्य स्थानीय उत्पादों को दिल्ली और मुंबई सहित देश के बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाने के नए अवसर खुल रहे हैं। वहीं, सीमेंट, खाद्यान्न और अन्य जरूरी सामान की घाटी तक आपूर्ति भी आसान हुई है।
रेलवे के माध्यम से कश्मीर से सेब की बड़े पैमाने पर ढुलाई की जा रही है। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक के मुताबिक, कटरा से मुंबई के बांद्रा स्टेशन तक चेरी करीब 30 घंटे में पहुंचाई गई। इससे परिवहन समय घटने के साथ फलों के खराब होने की आशंका और ढुलाई की लागत कम होने की उम्मीद है। सड़क मार्ग पर बर्फबारी, भूस्खलन और अन्य बाधाओं के कारण यातायात प्रभावित होने की स्थिति में रेल संपर्क अधिक भरोसेमंद विकल्प बन सकता है।

दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर खेलों, विशेषकर क्रिकेट के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। टीम ने 2025-26 सत्र में पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतकर इतिहास रचा। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस उपलब्धि को पूरे कश्मीर के लिए गौरव का क्षण बताया। इस जीत से स्थानीय युवाओं में क्रिकेट के प्रति उत्साह बढ़ने और खेल को करियर के रूप में अपनाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में अक्टूबर 2026 में प्रतिष्ठित ईरानी कप का आयोजन भी घाटी में बड़े क्रिकेट मुकाबलों की वापसी का महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय मैचों की नियमित मेजबानी के लिए आधुनिक स्टेडियम, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं और मजबूत खेल बुनियादी ढांचे का विस्तार जरूरी होगा।
इस तरह रेल कनेक्टिविटी में सुधार और खेलों में उभरती उपलब्धियां कश्मीर के आर्थिक विकास, स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसरों और राष्ट्रीय स्तर पर घाटी की पहचान को नई दिशा दे सकती हैं।
