▪️सूर्यकांत उपाध्याय

एक पुजारी और एक नाई अच्छे मित्र थे। नाई हमेशा पुजारी से कहता था, “ईश्वर ऐसा क्यों करता है, वैसा क्यों करता है? कहीं बाढ़ आ जाती है, तो कहीं सूखा पड़ जाता है। कहीं दुर्घटनाएँ होती हैं, तो कहीं भुखमरी की स्थिति बनी रहती है। लोगों को नौकरी नहीं मिलती। ईश्वर लोगों को इतनी सारी परेशानियाँ क्यों देता रहता है?”
एक दिन पुजारी उसे एक ऐसे व्यक्ति के पास ले गया, जो भिखारी था। उसके बाल बहुत बड़े थे और दाढ़ी भी काफी बढ़ी हुई थी।
पुजारी ने नाई से कहा, “इस व्यक्ति को देखो। इसके बाल और दाढ़ी कितने बढ़ गए हैं। तुम नाई हो और फिर भी तुम्हारे रहते हुए इसकी यह हालत क्यों है?”
नाई ने जवाब दिया, “अरे! इसने मुझसे संपर्क ही नहीं किया।”
पुजारी मुस्कुराया और बोला, “बस, यही तो बात है! जो लोग ईश्वर से संपर्क करते हैं, उन्हें अपने दुखों से उबरने की शक्ति और सही रास्ता मिलता है। लेकिन लोग ईश्वर से संपर्क ही नहीं करते और फिर कहते हैं कि वे दुखी हैं।”
- सीख: जिस प्रकार बाल कटवाने के लिए नाई के पास जाना पड़ता है, उसी प्रकार जीवन में शांति, शक्ति और मार्गदर्शन पाने के लिए ईश्वर से जुड़ना भी आवश्यक है।
