■ सरकार कर रही है मंथन

● नई दिल्ली
राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर सरकार इसके लिए भी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ जैसा प्रोटोकॉल लागू करने पर विचार कर रही है। यदि यह योजना अमल में आती है, तो सार्वजनिक अवसरों पर ‘वंदे मातरम’ के दौरान भी लोगों को खड़ा होना पड़ सकता है।
फिलहाल राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 केवल राष्ट्रगान पर लागू होता है। संविधान के अनुच्छेद 51(ए) में भी नागरिकों से राष्ट्रगान के सम्मान की अपेक्षा की गई है, हालांकि ‘वंदे मातरम’ के संदर्भ में न तो खड़े होने और न ही गायन में भाग लेने की कोई कानूनी बाध्यता तय है।
इसी अंतर को समाप्त करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट और कई हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें ‘वंदे मातरम’ पर भी राष्ट्रगान जैसे नियम लागू करने की अपील की गई है। सरकार का पक्ष अब तक यही रहा है कि मौजूदा नियम केवल ‘जन गण मन’ तक सीमित हैं।
गृह मंत्रालय के निर्देशों में राष्ट्रगान की अवधि और उसके गायन के समय अपनाए जाने वाले आचरण को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिसमें सभी का खड़ा होना और सम्मान प्रकट करना शामिल है। कानून के अनुसार, राष्ट्रगान के सम्मान में बाधा डालने या किसी को रोकने पर तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
अब इसी तर्ज पर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भविष्य में ऐसे ही कानूनी प्रावधान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर भी लागू किए जा सकते हैं।
