■ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया लोकार्पण

● नवी मुंबई
विधिक शिक्षा और अदालतों में व्यावहारिक पैरवी के बीच लंबे समय से महसूस की जा रही खाई को पाटने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल द्वारा स्थापित भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अधिवक्ता प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र का शनिवार को नवी मुंबई में लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे अधिवक्ता प्रशिक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि यह केंद्र कानून की पढ़ाई को जमीन पर उतरने वाली न्यायिक दक्षता से जोड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक न्यायाधीशों के लिए तो प्रशिक्षण अकादमियां थीं, लेकिन अधिवक्ताओं के लिए ऐसी समर्पित व्यवस्था नहीं थी। बार काउंसिल ने इस कमी को दूर करते हुए बदलते कानूनों, नई आपराधिक संहिताओं और समकालीन चुनौतियों के अनुरूप प्रशिक्षित अधिवक्ता और अभियोजक तैयार करने की मजबूत आधारशिला रखी है। तलोजा स्थित इस आधुनिक अकादमी का उद्घाटन देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति भूषण आर. गवई ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर ने की।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार इस अकादमी को 10 करोड़ रुपये का अनुदान देगी, जो आगामी बजट सत्र के बाद जारी किया जाएगा। उन्होंने तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग के बीच संतुलन और गहन अध्ययन की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि कानून की गुणवत्ता का आधार गंभीर शोध और सतत अभ्यास है।
समारोह में न्यायमूर्ति बी.बी. चव्हाण को ‘विधि महर्षि पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। अमरावती के सिविल अधिवक्ता ज्ञानेश्वर बावरेकर को मरणोपरांत सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और बार काउंसिल के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
