■ दवा सस्ती, दारू महंगी
■ विदेशी टूर पैकेजों पर लगने वाला टैक्स कम
■ सोलर पैनल सस्ता, रेल कनेक्टिविटी पर जोर
■ अर्थव्यवस्था को स्थिर गति देने की कोशिश

● नई दिल्ली
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया। यह बजट ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमें आर्थिक स्थिरता, बुनियादी ढांचे के विस्तार, रोजगार सृजन और दीर्घकालिक निवेश को प्राथमिकता दी गई है। एक तरफ जहां कैंसर की दवाएं, विदेशी शिक्षा और सौर पैनल सस्ते होने की राह पर हैं, वहीं आयातित शराब, कॉफी मशीनें और ट्रेडिंग गतिविधियों पर खर्च बढ़ने वाला है।
बजट में सरकार ने पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को बढ़ाते हुए बुनियादी ढांचे पर बड़े निवेश का संकेत दिया है। सड़क, रेल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नई परियोजनाओं के जरिए आर्थिक गतिविधियों को गति देने पर जोर दिया गया है। विशेष रूप से रेल और परिवहन क्षेत्र में आधुनिक कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक कॉरिडोर और हाई-स्पीड नेटवर्क के विस्तार की योजनाएं शामिल की गई हैं।
राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए सरकार ने वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखने का लक्ष्य दोहराया है। इससे निवेशकों के भरोसे को मजबूती मिलने और अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने की उम्मीद जताई जा रही है। कर ढांचे में बड़े बदलाव से परहेज करते हुए करदाताओं को स्थिरता का संदेश दिया गया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। जैव-प्रौद्योगिकी और फार्मा सेक्टर को सशक्त बनाने की दिशा में नई पहलें घोषित की गई हैं, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। शिक्षा और कौशल विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि युवा आबादी को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
इसके अलावा एमएसएमई, स्टार्ट-अप्स, सेमीकंडक्टर और डेटा इकोनॉमी जैसे उभरते क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने की घोषणाएं बजट का अहम हिस्सा रहीं। कुल मिलाकर बजट 2026-27 को विकास और संतुलन का बजट माना जा रहा है, जो अल्पकालिक राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती की दिशा में कदम बढ़ाने का संकेत देता है।
