
● सागर
मध्यप्रदेश के सागर स्थित रुद्राक्षधाम आश्रम में आयोजित सात दिवसीय रामकथा के दौरान प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने व्यासपीठ से उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठा के पावन उत्सव पर वे रामरसिया हनुमान जी को रामकथा सुनाने आए हैं। उन्होंने कहा कि “जय श्रीराम” अब देश का संसदीय मंत्र बन चुका है।
पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने रामकथा का महात्म्य बताते हुए कहा कि रामकथा केवल लोकगाथा ही नहीं, परलोकगाथा भी है। अतः सर्वकाल श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण करना चाहिए। कथा के लिए हृदय में श्रद्धा आवश्यक है, इसके बिना कथा सुलभ नहीं होती। उन्होंने कहा कि कैलास से निकली रामकथा नीचे न आकर ऊपर चढ़ती चली गई और प्रयाग होते हुए काशी पहुँची। कथा, भजन और पुराण आदि केवल एक बार नहीं, बार-बार सुनने और सुनाने चाहिए। विभिन्न मतों के लोगों को सुधारने की कोशिश करने के बजाय स्वयं को व्यवस्थित करना चाहिए। कथा श्रवण से कुसंगी भी सत्संगी बन जाता है। रामकथा दुःख-पुंजों का नाश कर जीवन में सुख प्रदान करती है। गंगा जी की भाँति रामकथा भी जीव को जीवंतता प्रदान कर मंगल करती है। भगवान ने शरणागत की रक्षा की टेक रखी है और भगवान की शरण में वही आ सकता है जो अत्यंत पुण्यशाली हो।
रामकथा प्रवाह में पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि आजकल सुंदरकांड करने वाले बहुत हो गए हैं, जबकि हनुमान जी को सुंदरकांड प्रिय नहीं है। उन्हें रामनाम से प्रेम है। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए संपूर्ण रामचरितमानस का श्रवण करना चाहिए। सुंदरकांड हनुमान जी के लीला-महोत्सव की कथा है और कोई भी विवेकी व्यक्ति आत्म-प्रशंसा नहीं सुनता। कृपा करना भगवान का स्वभाव है, वे जिसके आचार-व्यवहार से प्रसन्न होते हैं, उस पर अवश्य कृपा करते हैं। उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि आहरण-वृत्ति का पोषक रावण कभी पूजनीय नहीं हो सकता, क्योंकि हमारी सनातन संस्कृति त्याग की संस्कृति है। ब्राह्मण का अपमान सदैव विनाशकारी होता है, अतः इससे बचना चाहिए। रामकथा के विभिन्न प्रसंगों का गान करते हुए पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने रामराज्याभिषेक के साथ अपनी रामकथा को विश्राम दिया।

इस सात दिवसीय रामकथा के आयोजक, मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री एवं वर्तमान विधायक भूपेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या में निर्मित राममंदिर अब राष्ट्रमंदिर बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज विगत 30 वर्षों से अपनी रामकथा की अविरल रसधारा के माध्यम से सनातन धर्म, संस्कृति और हिंदू जीवनशैली का देश-विदेश तक प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। 30 वर्षों की रामकथा गायन यात्रा में उन्होंने स्वयं दर्जनों भजनों की रचना भी की है। देश के कुछ विख्यात चिकित्सकों का मानना है कि पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज के प्रवचनों और भजनों को सुनने से रोगियों को अल्पकाल में ही स्वास्थ्य लाभ होने लगता है।
विधायक भूपेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय दीवान आमोद सिंह ने अपनी पैतृक भूमि में से 18.36 एकड़ भूमि धर्म-सेवार्थ अर्पित की थी। वर्ष 2014 में सात दिनों के भीतर 39 करोड़ पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया गया था। अब रुद्राक्षधाम में दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठा होना हम सभी का परम सौभाग्य है। इस रामकथा में कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल, विधायक उमाकांत शर्मा, बृज बिहारी पटेरिया, वीरेंद्र सिंह, कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, पूर्व कैबिनेट मंत्री गोपाल भार्गव, भोपाल की महापौर मालती राय सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।
