■ जानिए विशेषज्ञों की राय

● मुंबई
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अधिकांश लोग अपने खानपान पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते। काम का दबाव, अनियमित दिनचर्या और फास्ट फूड की बढ़ती आदतों के कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। इसी वजह से आजकल बड़ी संख्या में लोग मल्टीविटामिन सप्लीमेंट का सहारा लेने लगे हैं।
मल्टीविटामिन ऐसे सप्लीमेंट होते हैं जिनमें कई प्रकार के विटामिन और खनिज एक साथ मौजूद रहते हैं, जैसे विटामिन A, B, C, D, E के साथ आयरन, कैल्शियम और जिंक आदि। इनका उद्देश्य शरीर में पोषण की कमी को पूरा करना होता है। आमतौर पर डॉक्टर तब मल्टीविटामिन लेने की सलाह देते हैं, जब किसी व्यक्ति के शरीर में किसी विशेष विटामिन या मिनरल की कमी पाई जाती है या उसकी डाइट संतुलित नहीं होती।
जानकारों के अनुसार हर व्यक्ति के लिए रोजाना मल्टीविटामिन लेना आवश्यक नहीं है। यदि कोई व्यक्ति संतुलित और पौष्टिक भोजन लेता है, जिसमें फल, हरी सब्जियां, अनाज, दालें और पर्याप्त प्रोटीन शामिल हों, तो शरीर को अधिकतर जरूरी पोषक तत्व भोजन से ही मिल जाते हैं। ऐसी स्थिति में बिना आवश्यकता के रोजाना मल्टीविटामिन लेना जरूरी नहीं माना जाता।
विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि जरूरत से ज्यादा विटामिन लेना नुकसानदेह भी हो सकता है। कुछ विटामिन, जैसे A, D, E और K शरीर में जमा होने लगते हैं। इनकी अधिक मात्रा लंबे समय तक लेने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि कुछ परिस्थितियों में मल्टीविटामिन फायदेमंद साबित हो सकते हैं। जिन लोगों का आहार संतुलित नहीं होता, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं या कुछ बीमारियों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह पर इनका सेवन करना पड़ सकता है। कई बार लगातार थकान, कमजोरी या पोषक तत्वों की कमी के लक्षण दिखाई देने पर भी चिकित्सक सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं।
इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि मल्टीविटामिन को आदत बनाने से पहले अपनी डाइट, जीवनशैली और स्वास्थ्य की जरूरतों को समझना जरूरी है। सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि किसी भी सप्लीमेंट की शुरुआत डॉक्टर की सलाह से ही की जाए।
