
● नई दिल्ली
लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। दो दिनों तक चली तीखी बहस के बाद सदन ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिसके साथ ही बिरला के अध्यक्ष पद पर बने रहने का मार्ग स्पष्ट हो गया।
यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कई विपक्षी दलों के समर्थन से पेश किया था। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सदन के संचालन में निष्पक्षता का अभाव दिखाई देता है। हालांकि सत्ता पक्ष और एनडीए के नेताओं ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए अध्यक्ष की कार्यशैली का समर्थन किया।
बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अध्यक्ष की भूमिका का बचाव करते हुए कहा कि संसद की कार्यवाही विश्वास और स्थापित संसदीय नियमों के आधार पर चलती है। उनके अनुसार स्पीकर सदन के निष्पक्ष संरक्षक होते हैं, जिनकी जिम्मेदारी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को समान अवसर उपलब्ध कराना है। शाह ने यह भी कहा कि संसद कोई बाजार नहीं है, यहां प्रत्येक सदस्य को नियमों और परंपराओं का पालन करना होता है।

दूसरी ओर विपक्षी सांसदों ने असहमति जताते हुए कहा कि संसद में विरोध के स्वर के लिए जगह सिमटती जा रही है। राजद सांसद अभय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया कि कई बार विपक्षी सदस्यों को चेयर से अपेक्षित संरक्षण नहीं मिलता। उन्होंने एक दिन में बड़ी संख्या में सांसदों के निलंबन जैसी घटनाओं को लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंताजनक बताया।
अंततः मतदान की औपचारिक प्रक्रिया के बजाय ध्वनि मत से प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया और ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष के पद पर यथावत बने रहे।
