- 238 उपनगरीय ट्रेनों में लगेंगे ऑटोमैटिक दरवाजे
- 33 हजार करोड़ के एमयूटीपी प्रोजेक्ट पर तेजी से काम

● मुंबई
मुंबई की उपनगरीय लोकल ट्रेनों में बढ़ती भीड़ और यात्रियों के गिरकर होने वाली मौतों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि एमयूटीपी के तहत करीब 33 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
उन्होंने बताया कि उपनगरीय रेल नेटवर्क में सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने के लिए 238 लोकल ट्रेनों में ऑटोमैटिक दरवाजे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही 15 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों के संचालन को ध्यान में रखते हुए 34 रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाने का कार्य भी जारी है।
लोकसभा में यह जानकारी उत्तर-पश्चिम मुंबई से सांसद रविन्द्र वायकर के प्रश्न के उत्तर में दी गई। वायकर ने लोकल ट्रेनों में बढ़ती भीड़ और यात्रियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए बताया कि वर्ष 2015 से मई 2025 के बीच लोकल से गिरकर 26,547 यात्रियों की मौत हो चुकी है। हालांकि इस वर्ष यह संख्या लगभग 7 प्रतिशत कम हुई है, फिर भी औसतन प्रतिदिन करीब छह यात्रियों की जान जा रही है।
सांसद वायकर ने लोकसभा में यह भी पूछा कि भीड़ कम करने के लिए डबल डेकर लोकल ट्रेनों की कोई योजना है या नहीं और कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन की लाइन के दोहरीकरण का काम कब तक पूरा होगा।
रेल मंत्री वैष्णव ने जवाब में बताया कि भीड़ कम करने के लिए कई प्रमुख स्टेशनों के आसपास रेल लाइन विस्तार और अन्य विकास कार्य किए जा रहे हैं। इनमें बांद्रा, मुंबई सेंट्रल, जोगेश्वरी, दादर, वसई, परेल, विरार, डहाणू, मीरा रोड, पनवेल, कल्याण और एलटीटी सहित कई स्टेशन शामिल हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कोंकण रेलवे के डबल ट्रैक प्रोजेक्ट के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। इस परियोजना में महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और केरल की भागीदारी है। महाराष्ट्र और गोवा ने अपनी मंजूरी दे दी है, जबकि कर्नाटक और केरल की स्वीकृति अभी शेष है।
रेल मंत्रालय का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों की सुरक्षा के साथ सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
