■ श्री श्री रविशंकर ने किया दर्शन

विनीत त्रिपाठी@वाराणसी
अनादि काल से धर्म, साधना और लोककल्याण की धारा बहाने वाली काशी में, काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव के पावन दरबार में इस वर्ष का होली मिलन समारोह एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति बनकर प्रकट हुआ। यह आयोजन केवल रंगों का उत्सव नहीं रहा, बल्कि राष्ट्र और समस्त विश्व के लिए शांति, सौहार्द और धर्म-संरक्षण का एक सामूहिक संकल्प बन गया।
पंडित अवशेष पांडेय (कल्लू महाराज), उपमहंत प्रमुख मंदिर काशी के सान्निध्य में संपन्न इस दिव्य आयोजन में अंतरराष्ट्रीय धर्मगुरु श्री श्री रविशंकर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने वातावरण को और भी ऊर्जामय बना दिया। भक्तों ने एक स्वर में बाबा कालभैरव के श्रीचरणों में प्रार्थना अर्पित की कि समस्त बाधाएं दूर हों, अधर्म का नाश हो और विश्व में शांति का प्रकाश फैले।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध की विभीषिकाओं के बीच, यह आयोजन मानो एक आध्यात्मिक उत्तर बनकर उभरा। विशेष पूजा-अर्चना, दिव्य आरती और अलौकिक श्रृंगार के माध्यम से शांति, करुणा और सद्भाव का संदेश दिया गया। मंदिर परिसर भक्ति-रस और रंगों के उल्लास से सराबोर हो उठा, जहां हर एक आस्था के रंग में रंगा दिखाई दिया।

श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर केवल होली की शुभकामनाएं ही नहीं दीं, बल्कि मन के विकारों को त्यागकर प्रेम, एकता और भाईचारे के रंग में रंगने का संदेश भी आत्मसात किया। हर हृदय से यही प्रार्थना निकली कि बाबा कालभैरव की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास हो।
इस अवसर पर पंडित अवशेष पांडेय ने कहा कि काशी की सनातन परंपरा सदैव ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के भाव को जीती आई है। यहां होने वाले ऐसे आध्यात्मिक आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का माध्यम हैं।
इस प्रकार, कालभैरव दरबार में मनाया गया यह होली मिलन समारोह रंगों से आगे बढ़कर आत्मा को स्पर्श करने वाला, शांति और सद्भाव का दिव्य संदेश बन गया।
