
लखनऊ। चारबाग स्थित रविंद्रालय में आयोजित पुस्तक मेले के अंतर्गत अवधी साहित्य संस्थान, अमेठी एवं उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में अवधी विमर्श एवं कवि सम्मेलन संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता अवध भारती संस्थान, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त डॉ. राम बहादुर मिश्र ने की, जबकि मुख्य अतिथि अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) विवेक नौटियाल रहे। विशेष अतिथि के रूप में महाराष्ट्र सरकार के छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्रीय एकता पुरस्कार से सम्मानित लेखक व पत्रकार राजेश विक्रांत (मुंबई) उपस्थित रहे।
माँ सरस्वती के चित्र पर पूजन व माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सभी अतिथियों व कवियों का स्वागत संस्थान अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पाण्डेय ने अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर किया।
मुख्य अतिथि विवेक नौटियाल ने कहा कि साहित्यकार की आयु से अधिक उसकी साहित्यिक आयु महत्त्वपूर्ण होती है। एक रचना उसे चिरकाल तक अमर बना देती है। उन्होंने कहा कि अवधी अब वैश्विक स्तर पर बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। साहित्य को पुस्तकों तक सीमित न रखकर जनमानस, विद्यार्थियों और युवाओं से जोड़ना आवश्यक है।
अध्यक्ष डॉ. राम बहादुर मिश्र ने अवधी को करोड़ों लोगों की भाषा बताते हुए गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ को विश्व का श्रेष्ठ ग्रंथ बताया और युवाओं से साहित्य सृजन का आह्वान किया।

राजेश विक्रांत, डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तंड, डॉ. मीनू खरे एवं पारस नाथ प्रसाद ने अवधी की समृद्ध परंपरा, मिठास और सांस्कृतिक धरोहर पर प्रकाश डाला। डॉ. विनय दास ने अवधी को मातृभाषा बताते हुए नई पीढ़ी को इससे जोड़ने पर बल दिया।
कवि सम्मेलन में जय प्रकाश तिवारी, राजेंद्र प्रसाद शुक्ल “अमरेश”, रामेश्वर सिंह “निरास”, शब्बीर अहमद “सूरी”, रामबदन शुक्ल “पथिक”, अमर बहादुर सिंह “अमर”, जगदंबा तिवारी “मधुर”, फतेह बहादुर सिंह “कसक”, अनिल श्रीवास्तव “लल्लू”, रत्नेश कुमार, हरिनाथ शुक्ल “हरि”, रश्मिशील राजेंद्र, अरुण तिवारी “बोले चिरैया”, राज कपूर शुक्ला “राज”, प्रतिभा गुप्ता, विजय प्रकाश तिवारी, डॉ. नरेश चंद्र तिवारी, ज्योति रतन, पप्पू अवस्थी, डॉ. सुषमा सौम्या एवं कृष्णानंद राय ने काव्य पाठ किया।
कार्यक्रम में कैलाश नाथ शर्मा, राम यज्ञ तिवारी, राम प्रगट कनौजिया, मिथिलेश कुमार, डॉ. अभिमन्यु पाण्डेय, रीता पाण्डेय सहित सैकड़ों साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
