
● नई दिल्ली
देश की राजनीतिक फंडिंग में इस वर्ष उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय दलों को मिलने वाले चंदे में पिछले साल की तुलना में 161 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस वृद्धि में सत्तारूढ़ भाजपा का दबदबा स्पष्ट रूप से सामने आया है, जिसने अन्य सभी राष्ट्रीय दलों की तुलना में कई गुना अधिक चंदा प्राप्त किया।
चुनावी पारदर्शिता पर नजर रखने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 20,000 रुपये से अधिक के घोषित दान के तहत राष्ट्रीय दलों को कुल 6,648.56 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह राशि 11,343 दानदाताओं के माध्यम से आई है।
आंकड़ों के अनुसार, भाजपा को 5,522 दानदाताओं से 6,074.01 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो कुल चंदे का बड़ा हिस्सा है। वहीं, कांग्रेस को 2,501 दानदाताओं से 517.39 करोड़ रुपये का योगदान मिला।
रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि भाजपा को मिला चंदा कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के संयुक्त चंदे से दस गुना से अधिक है। यह अंतर देश की राजनीतिक फंडिंग के बदलते स्वरूप को रेखांकित करता है।
दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया है कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 20,000 रुपये से अधिक का कोई भी चंदा प्राप्त न होने की घोषणा की है।
यह आंकड़े न केवल दलों की आर्थिक ताकत को दर्शाते हैं बल्कि भारतीय राजनीति में संसाधनों के असंतुलन की ओर भी संकेत करते हैं।
