
● वाराणसी
संगीत जगत की स्वर कोकिला आशा भोसले की अस्थियों का सोमवार को काशी में पवित्र गंगा में विधिपूर्वक विसर्जन किया गया। मुंबई से उनके पुत्र आनंद भोसले और पौत्री जनाई भोसले अस्थि कलश लेकर अस्सी घाट पहुंचे, जहां से नाव के माध्यम से गंगा के मध्य प्रवाह तक जाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
वैदिक मंत्रों के उच्चारण और गहरी भावनाओं के बीच जनाई भोसले ने नम आंखों से अपनी दादी को अंतिम विदाई दी। मां गंगा में अस्थि विसर्जन के बाद घाट पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पिंडदान और तर्पण की रस्में भी संपन्न कराई गईं। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण श्रद्धा, स्मृति और संवेदना से ओतप्रोत रहा।
परिजनों ने बताया कि अपने अंतिम समय में आशा भोसले ने काशी में अस्थि विसर्जन की इच्छा जताई थी। उनका निधन 12 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ था।
पुत्र आनंद भोसले के अनुसार, उनकी मां जीवन में केवल एक बार काशी आई थीं, लेकिन भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट आस्था थी। उसी श्रद्धा और उनकी अंतिम इच्छा को सम्मान देते हुए परिवार ने काशी में यह संस्कार पूरा किया। सभी धार्मिक विधियां संपन्न करने के बाद परिजन मुंबई लौट गए।

नमन