
▪️मुंबई
बाल कटवाने या दाढ़ी बनवाने के बाद अधिकांश सैलून में नाई चेहरे पर फिटकरी रगड़ते हैं। यह वर्षों पुरानी परंपरा केवल आदत नहीं, बल्कि इसके पीछे कई व्यावहारिक और वैज्ञानिक कारण भी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, शेविंग के दौरान रेज़र से त्वचा पर बेहद बारीक कट या खरोंच आ सकती है, जो अक्सर दिखाई नहीं देती। फिटकरी में कसैले (Astringent) और जीवाणुरोधी (Antibacterial) गुण पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसे लगाने से त्वचा की ऊपरी सतह सिकुड़ती है, छोटे कटों से निकलने वाला खून जल्दी रुकता है और संक्रमण का खतरा भी कम हो सकता है।
फिटकरी लगाने पर हल्की जलन महसूस होना सामान्य माना जाता है। यह संकेत हो सकता है कि त्वचा पर कहीं सूक्ष्म कट लगा है। कुछ ही क्षणों में यह जलन कम हो जाती है और त्वचा को ठंडक व ताजगी का एहसास होने लगता है। साथ ही, यह रेज़र बर्न और हल्की सूजन को कम करने में भी सहायक मानी जाती है।
हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा एक जैसी नहीं होती। जिन लोगों की त्वचा बहुत संवेदनशील या अत्यधिक शुष्क है, उन्हें फिटकरी का अधिक या बार-बार उपयोग करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा में रूखापन या जलन बढ़ सकती है। यदि शेविंग के बाद लंबे समय तक लालिमा, तेज़ जलन या एलर्जी बनी रहे तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
यही वजह है कि आज आधुनिक आफ्टरशेव लोशन उपलब्ध होने के बावजूद कई पारंपरिक सैलून फिटकरी का उपयोग करते हैं। कम लागत, प्राकृतिक गुण और छोटे घावों पर प्रभावी उपयोगिता के कारण यह आज भी शेविंग के बाद त्वचा की देखभाल का भरोसेमंद विकल्प मानी जाती है।
