▪️भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजीं 14 नई बैक्टीरिया प्रजातियां

• पुणे। पुणे स्थित राष्ट्रीय कोशिका विज्ञान केंद्र (NCCS) के वैज्ञानिकों ने भारत के आदिवासी समुदायों पर किए गए एक महत्वपूर्ण अध्ययन में आंत (गट) के माइक्रोबायोम से 14 नई बैक्टीरिया प्रजातियों की पहचान की है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज बताती है कि भारतीय आबादी, विशेषकर आदिवासी समुदायों की आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की दुनिया अब तक काफी हद तक अनदेखी रही है।
इस अध्ययन में देश के आठ आदिवासी समुदायों के 76 वयस्कों के आंतों के माइक्रोबायोम का विश्लेषण किया गया। जांच में कुल 273 बैक्टीरिया प्रजातियां मिलीं, जिनमें 173 का पहले कभी जीनोम अनुक्रमण नहीं हुआ था। इनमें से 14 बैक्टीरिया प्रजातियां विज्ञान के लिए पूरी तरह नई हैं। साथ ही करीब 200 ऐसे सूक्ष्मजीव स्ट्रेन भी मिले, जिनका पहले कोई वैज्ञानिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह शोध इस धारणा को चुनौती देता है कि पूरी दुनिया के लिए एक जैसा ‘स्वस्थ गट माइक्रोबायोम’ हो सकता है। किसी व्यक्ति की आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीव उसके खान-पान, भौगोलिक क्षेत्र, संस्कृति और जीवनशैली के अनुसार अलग-अलग होते हैं। इसलिए पश्चिमी देशों के आंकड़ों के आधार पर तैयार किए गए प्रोबायोटिक्स और स्वास्थ्य मानकों को भारतीय आबादी पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि हिमालयी क्षेत्रों के डेयरी-आधारित भोजन करने वाले समुदायों में लाभकारी बैक्टीरिया की विविधता अधिक थी, जबकि अन्य क्षेत्रों में स्थानीय भोजन के अनुसार अलग-अलग सूक्ष्मजीव विकसित हुए। शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में भारत के लिए अलग माइक्रोबायोम डेटाबेस तैयार करने से पोषण, मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा और व्यक्तिगत चिकित्सा (पर्सनलाइज्ड मेडिसिन) के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
