
▪️नई दिल्ली
दिल की बीमारियां अब केवल बढ़ती उम्र तक सीमित नहीं रह गई हैं। डॉक्टरों के अनुसार, कई लोगों में जन्म से ही ‘खराब’ यानी LDL (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से अधिक होता है। यदि समय रहते इसकी पहचान और उपचार न किया जाए तो यह कम उम्र में ही हार्ट अटैक और अन्य गंभीर हृदय रोगों का कारण बन सकता है। यह समस्या अक्सर पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवारों में आनुवंशिक रूप से चली आती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ‘फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया’ (Familial Hypercholesterolemia) नामक आनुवंशिक बीमारी में शरीर रक्त से अतिरिक्त LDL कोलेस्ट्रॉल को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाता। परिणामस्वरूप धमनियों में धीरे-धीरे चर्बी जमने लगती है और हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली नसें संकरी हो जाती हैं। कई मामलों में 30 से 40 वर्ष की उम्र से पहले ही हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टर बताते हैं कि यदि परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक, बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग का इतिहास रहा हो तो अन्य सदस्यों को भी समय रहते लिपिड प्रोफाइल जांच करानी चाहिए। बच्चों और किशोरों में भी कोलेस्ट्रॉल की जांच आवश्यक हो सकती है, क्योंकि यह बीमारी जन्म से मौजूद हो सकती है।
हालांकि आनुवंशिक कारणों को पूरी तरह बदला नहीं जा सकता, लेकिन संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी, वजन नियंत्रित रखना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन करके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और उपचार से हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति से बचाव संभव है।
