▪️सूर्यकांत उपाध्याय

एक बार स्वामी विवेकानंद वाराणसी में एक मंदिर से बाहर निकल रहे थे। उनके हाथ में कुछ पुस्तकें थीं। तभी बंदरों का एक झुंड उनके पीछे पड़ गया। बंदर लगातार उनका पीछा कर रहे थे। विवेकानंद जी तेज कदमों से आगे बढ़ने लगे, लेकिन बंदर भी उनके पीछे तेजी से आने लगे।
स्थिति देखकर एक वृद्ध संन्यासी ने आवाज लगाई, ‘रुको! उनका सामना करो। पीछे मत हटो।’
विवेकानंद जी तुरंत रुक गए। उन्होंने पीछे मुड़कर बंदरों की ओर दृढ़ता से देखा और एक कदम उनकी तरफ बढ़ाया। उनका आत्मविश्वास देखकर बंदर पीछे हटने लगे और कुछ ही क्षणों में वहां से भाग गए।
बाद में स्वामी विवेकानंद ने इस घटना को जीवन की बड़ी सीख के रूप में बताया-‘डरो मत। जिस चीज से डरते हो, उसका सामना करो।’
यह घटना केवल बंदरों की कहानी नहीं है। हमारे जीवन में भी अनेक प्रकार के ‘बंदर’ होते हैं-असफलता का डर, लोगों की आलोचना का डर, आर्थिक कठिनाइयों का डर, भविष्य की चिंता और अपने निर्णयों पर संदेह।
जब हम इनसे बचने की कोशिश करते हैं, तो डर और बड़ा होता जाता है। लेकिन जब हम साहस करके उसका सामना करते हैं, तो वही डर कमजोर पड़ने लगता है।
स्वामी विवेकानंद का संदेश था कि मनुष्य को अपनी आंतरिक शक्ति पहचाननी चाहिए। परिस्थितियां हमेशा हमारे अनुसार नहीं होंगी, लेकिन उनका सामना किस साहस से करना है, यह हमारे हाथ में है।
- शिक्षा : कई बार हमारी सबसे बड़ी जीत किसी और पर नहीं बल्कि अपने डर पर विजय पाने में होती है।
