
▪️मुंबई । E20 पेट्रोल को लेकर वाहन चालकों के बीच सबसे बड़ी चिंता माइलेज घटने को लेकर है। कई लोग इसके लिए पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल की मिलावट को जिम्मेदार मान रहे हैं। अब केंद्र सरकार ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वाहन का माइलेज केवल पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा से तय नहीं होता। ड्राइविंग का तरीका, ट्रैफिक, टायरों का दबाव, वाहन की सर्विसिंग और एसी का इस्तेमाल जैसे कई कारक ईंधन की खपत को प्रभावित करते हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इथेनॉल का कैलोरिफिक वैल्यू पेट्रोल से कम जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि E20 इस्तेमाल करने पर वाहन का माइलेज उसी अनुपात में कम हो जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक परिस्थितियों में वाहन की ईंधन दक्षता कई दूसरे पहलुओं पर निर्भर करती है।
भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य दिसंबर 2025 में हासिल कर लिया था। फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, विदेशी मुद्रा बचाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिली है। हालांकि, E20 को लेकर पुराने वाहनों की माइलेज और अनुकूलता पर बहस अभी भी जारी है।
ऐसे में वाहन का माइलेज कम होने पर केवल E20 को जिम्मेदार मानने के बजाय टायर प्रेशर, इंजन की स्थिति, नियमित सर्विसिंग, ड्राइविंग पैटर्न और एसी के इस्तेमाल जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।
