▪️आयुर्वेदिक उपाय पर उठे सवाल

- मुंबई। मोबाइल और सोशल मीडिया रील्स की बढ़ती लत बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। इसी बीच लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के आयुर्वेद विभाग से जुड़ा एक दावा चर्चा में है। इसके अनुसार मोबाइल कवर में तुलसी, बेलपत्र या पीपल का पत्ता रखने से मोबाइल रेडिएशन का प्रभाव कम होने के साथ रील्स देखने की आदत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
KGMU के आयुर्वेद विभाग के प्रभारी डॉ. सुनीत कुमार मिश्रा के हवाले से बताया गया है कि मोबाइल और रील्स की लत से परेशान लोगों के उपचार में पारंपरिक तरीकों के साथ काउंसलिंग का भी सहारा लिया जाता है। उनका दावा है कि मोबाइल कवर में इन पत्तों को रखने से मरीजों को मानसिक रूप से राहत महसूस होती है और बच्चों की पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस पद्धति पर अभी शोध जारी है।
रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल की अत्यधिक लत के कारण एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और अन्य परेशानियां हो सकती हैं। आयुर्वेदिक उपचार में ब्राह्मी, अश्वगंधा और जटामांसी जैसी औषधियों के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है।
विशेषज्ञों की सलाह के तौर पर बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर नजर रखने, सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करने और पढ़ाई या काम के दौरान मोबाइल से दूरी बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
- महत्वपूर्ण: तुलसी, बेलपत्र या पीपल का पत्ता मोबाइल रेडिएशन कम करता है या रील्स की लत छुड़ाता है, इसका अभी ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे प्रमाणित उपचार मानने के बजाय एक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
