▪️सूर्यकांत उपाध्याय

एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया। बैल घंटों जोर-जोर से रोता रहा। किसान उसकी आवाज सुनता रहा और सोचता रहा कि उसे कैसे बचाया जाए। अंततः उसने निर्णय लिया कि बैल बूढ़ा हो चुका है, इसलिए उसे बचाने का कोई लाभ नहीं है। उसने उसे कुएँ में ही दफनाने का फैसला किया।
किसान ने पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने फावड़े उठाए और कुएँ में मिट्टी डालना शुरू कर दिया। जब बैल को समझ आया कि क्या हो रहा है, तो वह और जोर-जोर से चिल्लाने लगा। कुछ देर बाद वह अचानक शांत हो गया।
किसान ने कुएँ में झाँककर देखा तो आश्चर्यचकित रह गया। उसकी पीठ पर गिरने वाली हर फावड़े भर मिट्टी को बैल अपने शरीर से झटककर नीचे गिरा देता और उस पर एक कदम आगे बढ़ जाता। जैसे-जैसे मिट्टी कुएँ में भरती गई, वह उसे सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करके ऊपर चढ़ता गया। कुछ ही देर में बैल कुएँ के किनारे पहुँच गया और छलांग लगाकर बाहर निकल आया।
▪️शिक्षा: हर परेशानी को झटककर उससे सीख लेनी चाहिए और उसी को अपनी सफलता की सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
