
मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच जब लोकसंगीत की मधुर स्वर-लहरियां गूंजती हैं, तो मिट्टी की खुशबू, सावन की फुहार और गांव की स्मृतियां अपने आप जीवंत हो उठती हैं। इसी सांस्कृतिक अनुभूति का सुंदर संगम है ‘बयार मित्र परिवार’ के तत्वावधान में मुंबई महानगर क्षेत्र में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला बयार कजरी समारोह। इस आयोजन की प्रतीक्षा उन तमाम मुंबईकरों को रहती है, जिनके मन में भारतीय लोकपरंपराओं और लोकसंगीत के प्रति गहरा अनुराग है।
कजरी भारतीय लोकसंगीत की एक समृद्ध और भावपूर्ण विधा है, जिसकी जड़ें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश की लोकसंस्कृति में दिखाई देती हैं। सावन-भादों के मौसम में जब आकाश बादलों से घिरता है, धरती हरियाली की चादर ओढ़ती है और वातावरण में वर्षा की सौंधी महक फैलती है, तब कजरी के सुर मन को विशेष रूप से स्पर्श करते हैं। कजरी में प्रेम, विरह, मिलन की आस और प्रकृति के मनोहारी रूप का भावपूर्ण चित्रण मिलता है। विशेषकर महिलाओं के मन की संवेदनाएं और अपने प्रियतम की प्रतीक्षा का भाव इन लोकगीतों में बड़ी सहजता से अभिव्यक्त होता है।

दहिसर पूर्व स्थित क्रिस्टल प्राइड हॉल में आयोजित बयार कजरी की संध्या इसी लोकपरंपरा का जीवंत उत्सव बन गई। प्रसिद्ध गायिका अंजलि पाठक, शशिकांत मिश्रा और उनकी पूरी टीम ने अपनी सुमधुर प्रस्तुति से ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर तक लोकसंगीत की भावधारा में डूबे रहे। मंच पर कजरी के पारंपरिक सुर गूंज रहे थे, तो सामने महिलाएं चूड़ियों की खनखनाहट के बीच झूले का आनंद लेते हुए सावन की पारंपरिक संस्कृति को साकार कर रही थीं।
कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ के बावजूद अभय मिश्र और उनकी टीम की सुव्यवस्थित एवं अनुशासित व्यवस्था के कारण पूरे आयोजन में सहजता और आत्मीयता बनी रही। अतिथियों के आगमन पर आयोजकों द्वारा पारंपरिक गमछा पहनाकर स्वागत करना भी आयोजन की विशिष्ट पहचान रहा। यह छोटा-सा सम्मान भारतीय संस्कृति की उस आत्मीय परंपरा को दर्शाता है, जिसमें अतिथि का स्वागत केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अपनेपन और सम्मान की अभिव्यक्ति माना जाता है।

बयार कजरी जैसे आयोजन केवल मनोरंजन के माध्यम नहीं हैं, बल्कि महानगर में हमारी लोकसंस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का महत्वपूर्ण प्रयास भी हैं। मुंबई जैसे महानगर में जहां विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों के लोग साथ रहते हैं, ऐसे कार्यक्रम सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करते हैं।
इन आयोजनों की एक विशेष खूबसूरती यह भी है कि यहां समाज के विभिन्न क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियों से एक साथ मिलने और संवाद करने का अवसर मिलता है। इस अवसर पर समरस फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. किशोर सिंह, शैलेंद्र श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडेय, आदित्य दुबे, विजय सिंह कौशिक, सुनील सिंह, आनंद मिश्रा, विनोद यादव, पुष्पराज मिश्रा, भगवती मिश्रा, राजकिशोर तिवारी, मनीषा गुरव, अर्जुन कांबले सहित अनेक गणमान्य लोगों से आत्मीय मुलाकात हुई।
बयार की कजरी केवल गीत-संगीत का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सावन की संवेदना, लोकजीवन की स्मृतियों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। मुंबई की धरती पर गूंजते कजरी के ये सुर आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी जड़ों और लोकपरंपराओं से जोड़ने का काम करते रहेंगे।
