
▪️सूर्यकांत उपाध्याय
आपने रावण के ऐसे चित्र अवश्य देखे होंगे, जिनमें एक व्यक्ति उसके पैरों के नीचे दबा दिखाई देता है। मान्यता है कि रावण उसे अपनी चरण-पादुका की तरह इस्तेमाल करता था। आखिर वह व्यक्ति कौन था? प्रचलित कथा के अनुसार, वह स्वयं शनिदेव थे।
कथा के अनुसार, रावण अमर होना चाहता था, लेकिन ब्रह्माजी ने उसे अमरता का वरदान नहीं दिया। इसके बाद उसने मनुष्य और वानर को छोड़कर अन्य सभी प्राणियों से अवध्य होने का वरदान प्राप्त किया। रावण ज्योतिष का भी प्रकांड विद्वान था। उसने अपने पुत्र मेघनाद को अमर बनाने के लिए सभी नवग्रहों को उसकी जन्मकुंडली के 11वें भाव में स्थित होने का आदेश दिया।
कहा जाता है कि सभी ग्रह रावण के भय से उसकी आज्ञा मान गए, लेकिन शनिदेव इस बात से चिंतित थे कि मेघनाद का अमर होना सृष्टि के लिए विनाशकारी हो सकता है। इसलिए उन्होंने पुत्र के जन्म के समय 11वें भाव से हटकर 12वें भाव में स्थान ग्रहण कर लिया। इससे मेघनाद महापराक्रमी तो हुआ, लेकिन अमर नहीं हो सका।
यह देखकर रावण क्रोधित हो उठा। उसने शनिदेव को कैद कर लिया और अपमानित करने के लिए उन्हें अपने पैरों के नीचे रखने लगा। बाद में लंका दहन के दौरान हनुमान जी ने शनिदेव को मुक्त कराया। लंबे समय तक कैद में रहने से उनके शरीर में पीड़ा थी। हनुमान जी ने उनके अंगों पर तेल लगाया। प्रसन्न होकर शनिदेव ने वरदान दिया कि हनुमान भक्तों पर उनकी कुदृष्टि नहीं पड़ेगी।
हालांकि, रामायण के कुछ संस्करणों में अलग कथा भी मिलती है। उसमें रावण के पैरों के नीचे अयोध्या के राजा अनरण्य का शरीर बताया गया है। मृत्यु से पहले अनरण्य ने रावण को श्राप दिया था कि उनके वंश में जन्म लेने वाला व्यक्ति ही उसका वध करेगा। यही श्राप आगे चलकर श्रीराम के हाथों रावण के अंत का कारण बना।
