- 30 सितंबर को एक ही दिन होगा चतुर्थी और पंचमी का श्राद्ध

▪️ मुंबई। पितृ पक्ष की शुरुआत इस वर्ष 26 सितंबर से होगी और 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा। इस दौरान पूर्वजों की स्मृति में तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान-पुण्य किए जाते हैं। इस बार पितृ पक्ष में तिथियों का विशेष संयोग बन रहा है। चतुर्थी और पंचमी, दोनों तिथियों का श्राद्ध 30 सितंबर 2026, बुधवार को ही किया जाएगा।
- क्यों एक ही दिन पड़ रही हैं दोनों तिथियां?
पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 29 सितंबर की शाम 5:09 बजे शुरू होकर 30 सितंबर को दोपहर 2:55 बजे समाप्त होगी। इसके तुरंत बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी, जो 1 अक्तूबर को दोपहर 12:35 बजे तक रहेगी।
श्राद्ध के लिए अपराह्न काल को महत्वपूर्ण माना जाता है। 30 सितंबर को चतुर्थी तिथि अपराह्न काल के एक हिस्से में मौजूद रहेगी और इसी दौरान पंचमी भी शुरू हो जाएगी। इसलिए दोनों तिथियों का श्राद्ध इसी दिन निर्धारित किया गया है।

- गुरुवार को क्यों नहीं होगा पंचमी श्राद्ध?
पंचमी तिथि 1 अक्तूबर को दोपहर 12:35 बजे समाप्त हो जाएगी, जबकि उस दिन श्राद्ध का अपराह्न काल इसके बाद शुरू होगा। ऐसे में पंचमी तिथि उस दिन श्राद्ध के मुख्य समय में मौजूद नहीं रहेगी। यही कारण है कि पंचमी का श्राद्ध 30 सितंबर को ही किया जाएगा।
पितृ पक्ष में तिथि और श्राद्ध के समय को लेकर स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए कर्मकांड करने वाले परिवार अपने क्षेत्र के पंचांग या आचार्य से समय की पुष्टि कर सकते हैं।
