▪️पुस्तक समीक्षा @राजेश विक्रांत

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग में उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यरत डॉ. नितेश धवन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से समाज कार्य में डॉक्टरेट तथा दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क से एम.फिल. किया है। लगभग 25 वर्षों के समृद्ध प्रशासनिक अनुभव के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार तथा भारत सरकार के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है। उन्होंने उद्यमिता विकास के क्षेत्र में अनेक उल्लेखनीय कार्य किए हैं। एक प्रतिष्ठित लेखक के रूप में डॉ. धवन ने 10 पुस्तकों की रचना की है, जिनमें शैक्षणिक एवं साहित्यिक दोनों विधाएं शामिल हैं।
उनकी पुस्तक ‘गीता दर्शन: जीवन रूपांतरण के 18 सूत्र’ का उद्देश्य गीता दर्शन के बहुमूल्य ज्ञान को सरल, सहज और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक गीता को केवल एक ग्रंथ के रूप में न पढ़ें, बल्कि उसके प्रत्येक सूत्र को अपने जीवन में आत्मसात कर सकें। गीता का ज्ञान जीवन को सार्थक, उद्देश्यपूर्ण और आनंदमय बनाने का मार्ग दिखाता है।
लेखक के अनुसार, गीता का महत्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन और व्यावहारिक मार्गदर्शन के रूप में भी अपार है। यह सिखाती है कि जीवन केवल भोग और उपभोग का नाम नहीं है, बल्कि आत्मा की शुद्धि और परमात्मा से मिलन का माध्यम भी है। यह ग्रंथ मनुष्य को मोह से मोक्ष की यात्रा पर अग्रसर करता है।
- गीता का संदेश हमें यह समझने में सहायता करता है कि संसार एक मायाजाल है और आत्मा इस माया से परे शाश्वत एवं अमर है। जब व्यक्ति इस सत्य को समझ लेता है, तो वह मोह, लोभ, क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या जैसे विकारों से ऊपर उठकर शांति और संतोष का अनुभव करने लगता है। गीता यह भी स्पष्ट करती है कि जीवन का सबसे बड़ा धर्म निष्काम भाव से कर्म करना है। ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ का यह उपदेश मनुष्य को कर्मयोग की ओर प्रेरित करता है।
- जीवन-प्रबंधन में गीता का अप्रतिम योगदान है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन-दर्शन है। यह हमें मोह से मोक्ष तक, अज्ञान से ज्ञान तक और अशांति से आनंद तक की यात्रा का बोध कराती है। गीता का उपदेश हमें समझाता है कि संसार मायामय है, जबकि आत्मा शाश्वत और अमर है। जब व्यक्ति इस सत्य को जान लेता है, तो वह जीवन के संघर्षों में संतुलन बनाए रखते हुए अपने उद्देश्य की ओर निरंतर बढ़ता रहता है।
- पुस्तक में गीता के 18 अध्यायों को जीवन-रूपांतरण के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। इनमें विषाद योग में मोह के कारण विषाद की उत्पत्ति, सांख्य योग में स्वधर्म का ज्ञान और उसमें दृढ़ रहने से विषाद से मुक्ति, कर्म योग में निष्काम कर्म द्वारा मन और आत्मा की शुद्धि तथा ज्ञान-कर्म-संन्यास योग में कर्म, विकर्म और अकर्म को समझने से अकर्ता भाव की उत्पत्ति को बताया गया है।
कर्म-संन्यास योग में कर्मयोग को श्रेष्ठ मार्ग बताते हुए फल-त्याग की आवश्यकता पर बल दिया गया है। आत्मसंयम योग में ध्यान के माध्यम से आत्मसंयम प्राप्त करने की विधि, ज्ञान-विज्ञान योग में ‘ज्ञान से जानो, विज्ञान से मानो और भक्ति से पाओ’ का संदेश दिया गया है। अक्षर ब्रह्म योग में ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म, अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ के मूल रहस्यों का प्रकटीकरण किया गया है।
राजविद्या योग में कर्मयोग और भक्तियोग के सुंदर संयोग, विभूति योग में हर श्रेष्ठता और सुंदरता में ईश्वर की उपस्थिति तथा विश्वरूप दर्शन योग में ईश्वर की विराटता के दर्शन से भक्ति और प्रतीति के बोध को समझाया गया है। भक्तियोग में प्रेम, समर्पण और शुद्ध आचरण से की गई भक्ति, क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग में शरीर को क्षेत्र, आत्मा को क्षेत्रज्ञ और ब्रह्म को जानने योग्य बताया गया है।
गुणत्रय विभाग योग में तमोगुण, रजोगुण और सत्त्वगुण को पहचानकर उनके पार जाना आत्म-उन्नति का मार्ग बताया गया है। पुरुषोत्तम योग में शरीर रूपी पुर में अधिष्ठित पुरुषोत्तम को जानने तथा भक्ति और कर्म के माध्यम से उनकी प्राप्ति का मार्ग बताया गया है। दैवासुर संपद्विभाग योग में निर्भयता और नम्रता जैसे दैवीय गुणों के साथ कर्मपथ पर अग्रसर होने का मार्ग प्रस्तुत किया गया है।
श्रद्धात्रय विभाग योग में श्रद्धा में सात्त्विकता, कर्म में सेवा-भाव और समस्त फलों का ईश्वर को समर्पण तथा मोक्ष-संन्यास योग में स्वधर्म-पालन, फल-त्याग और ईश्वर के प्रति समर्पण से मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग बताया गया है।
एक समर्पित लोकसेवक, लेखक और शिक्षाविद् डॉ. नितेश धवन ने बड़े मनोयोग से ‘गीता दर्शन’ का सृजन किया है। पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में मनुष्य के लिए जीवन-संदेश और अध्याय का सारांश दिया गया है। अंत में गीता के ज्ञानामृत से निकले 18 सूत्र दिए गए हैं, जो पाठक के जीवन को सकारात्मक दिशा देने और उसमें परिवर्तन लाने की प्रेरणा देते हैं।
• पुस्तक का प्रकाशन भारत बुक सेंटर, लखनऊ ने किया है। 152 पृष्ठों की इस पुस्तक का मूल्य 195 रुपए है।
