
▪️मुंबई। स्वर संगम फाउंडेशन की ओर से विरुंगला केंद्र में वरिष्ठ साहित्यकार सांवरमल सांगानेरिया का नागरिक अभिनंदन किया गया। असम और पूर्वोत्तर की संस्कृति को हिंदी समाज से जोड़ने में उनके योगदान को वक्ताओं ने सराहा। पूर्व संपादक राकेश शर्मा ने कहा कि सांगानेरिया को सांस्कृतिक पुरुष के रूप में याद किया जाएगा। रमन मिश्रा ने उनके यात्रा वृत्तांत ‘थोड़ी यात्रा, थोड़े कागज’ से जुड़े संस्मरण साझा किए। विशेष अतिथि प्रो. हूबनाथ पांडेय ने उनके पूर्वोत्तर संबंधी लेखन को विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की आवश्यकता बताई। आर.एस. विकल के लेखन प्रक्रिया संबंधी प्रश्न पर सांगानेरिया ने अपने अनुभव साझा किए।
द्वितीय सत्र में पुलक चक्रवर्ती ने ‘बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय और उनका वंदेमातरम’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बंकिमचन्द्र के समय की सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक परिस्थितियों तथा ‘आनंद मठ’ की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। इससे पहले प्रधानाचार्य महेश सिंह ने ‘आनंद मठ’ पर विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन हरिप्रसाद राय ने किया, जबकि हृदयेश मयंक ने आभार व्यक्त किया।
