- मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने शहरी विकास से जुड़ी दो अहम प्राथमिकताओं-कचरा प्रबंधन और बच्चों के स्वास्थ्य-को लेकर कदम आगे बढ़ाए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कचरे से संपीड़ित जैव गैस (सीबीजी) के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, मुंबई महानगरपालिका के स्कूलों में विद्यार्थियों की आंखों की जांच और उपचार के लिए ‘बाल दृष्टि’ अभियान के तहत तीन वर्षों में तीन लाख बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने वर्षा निवास पर आयोजित बैठक में सीबीजी परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने मुंबई, वसई-विरार, मीरा-भायंदर और कल्याण-डोंबिवली में संयंत्र स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए। पुणे के हिंजवड़ी और चाकण क्षेत्रों में भी परियोजनाओं पर विचार होगा। संयंत्रों की योजना कचरे की मात्रा, जमीन, तकनीकी सुविधाओं और गैस पाइपलाइन से दूरी के आधार पर बनाई जाएगी। कंपनियों, तेल कंपनियों और स्थानीय निकायों की भागीदारी से इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना है। इससे कचरा प्रबंधन में सुधार और स्थानीय निकायों के खर्च में कमी आने की उम्मीद है।
‘बाल दृष्टि’ अभियान के तहत फरवरी से सितंबर 2026 के बीच मुंबई महानगरपालिका के 227 स्कूलों के 40,270 विद्यार्थियों की जांच हुई। इनमें 361 बच्चों को चश्मे दिए गए और चार बच्चों की तिरछेपन की निःशुल्क शल्यक्रिया की गई। एक विद्यार्थी में मोतियाबिंद का भी पता चला। तीन वर्षों में 1,200 स्कूलों के तीन लाख विद्यार्थियों की जांच का लक्ष्य है।
हालांकि, आगे के उपचार के लिए भेजे गए 1,950 विद्यार्थियों में से अब तक केवल 549 ही चिकित्सालय पहुंचे हैं। ऐसे में बच्चों के उपचार को पूरा कराने के लिए अभिभावकों से संपर्क और नियमित निगरानी पर जोर दिया जाएगा।
