
● नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर एक अहम कदम बढ़ाते हुए अटल पेंशन योजना की अवधि बढ़ा दी है। अब यह योजना वर्ष 2030–31 तक लागू रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले से देश के लाखों असंगठित क्षेत्र के कामगारों और निम्न आय वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा।
सरकार के इस निर्णय से संकेत मिलता है कि अटल पेंशन योजना को लंबे समय तक मजबूती के साथ आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार है। योजना के विस्तार, सुधार और वित्तीय स्थिरता के लिए सरकार आगे भी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराती रहेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा, जिनके पास सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय का कोई दूसरा भरोसेमंद साधन नहीं है।
अटल पेंशन योजना का मूल उद्देश्य बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देना है। खासतौर पर गांवों, कस्बों और छोटे शहरों में काम करने वाले श्रमिकों को यह योजना औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ती है। छोटी-छोटी बचत के जरिए भविष्य को सुरक्षित बनाने का यह एक सुलभ माध्यम है।
9 मई 2015 को शुरू हुई यह योजना आज करोड़ों लोगों के लिए रिटायरमेंट प्लान का सरल विकल्प बन चुकी है। जो लोग किसी सरकारी या निजी पेंशन व्यवस्था से जुड़े नहीं हैं, उनके लिए यह सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है।
इस योजना में 18 से 40 वर्ष की आयु के व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। सदस्यता के दौरान हर माह तय राशि जमा करनी होती है, जो उम्र और चुनी गई पेंशन राशि पर निर्भर करती है। योगदान जितना अधिक होगा, पेंशन उतनी ही ज्यादा मिलेगी।
60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर माह 1000 से 5000 रुपये तक की सुनिश्चित पेंशन मिलती है। खाताधारक के निधन की स्थिति में जीवनसाथी को पेंशन जारी रहती है और दोनों के न रहने पर जमा राशि नामांकित व्यक्ति को सौंप दी जाती है।
सरकार का मानना है कि जिन लोगों के पास वृद्धावस्था की कोई ठोस वित्तीय योजना नहीं है, उनके लिए यह स्कीम बेहद उपयोगी है। वर्ष 2031 तक अवधि बढ़ने से नए लाभार्थियों को जुड़ने का अवसर मिलेगा और पहले से जुड़े लोगों का भरोसा भी और मजबूत होगा।
