■ हिमांशु राज़

राजस्थान में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन इनके कारण उभरी पर्यावरणीय समस्याएँ चिंता का विषय बन गई हैं। विशेषज्ञ रिपोर्ट्स बताती हैं कि बाड़मेर जैसे जिलों में सोलर प्लांट्स के आसपास तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। निर्माण कार्यों से लाखों पेड़ों की कटाई हुई, जिसने स्थानीय पारिस्थितिकी को गहरा आघात पहुँचाया। इसके परिणामस्वरूप पक्षियों व कीटों की संख्या घटी और खजूर व अनार की फसलें 75 प्रतिशत तक प्रभावित हुईं। ये बदलाव न केवल प्रकृति को बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुँचा रहे हैं।
राजस्थान सरकार की सौर ऊर्जा पहल के तहत बाड़मेर, जैसलमेर व जोधपुर में हजारों हेक्टेयर भूमि पर पैनल लगाए गए। ये परियोजनाएँ देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण हैं। फिर भी, स्थापना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वनस्पति नष्ट हुई। फतेहगढ़ क्षेत्र में ही करीब 2 लाख पेड़ जैसे बबूल व खेजड़ी हटाए गए। ये पेड़ मिट्टी संरक्षण व जल संतुलन में सहायक थे। कटाई के बाद मिट्टी क्षरण बढ़ा, भूजल स्तर 10-15 मीटर नीचे चला गया। परिणामतः क्षेत्र की जैव विविधता कमजोर पड़ी। सोलर पैनलों की डार्क सर्फेस सूर्य किरणों को अधिक अवशोषित करती है, जो ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव उत्पन्न करती है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी की रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट ज़ोन में दिन का तापमान 3-5 डिग्री अधिक रहता है। ग्रीष्मकाल में यह अंतर 7 डिग्री तक पहुँच जाता है। रात्रिकालीन तापमान में भी 2 डिग्री की बढ़ोतरी नोट हुई। इससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़े हीट स्ट्रोक के केस दोगुने हुए। पशुपालन प्रभावित हुआ, दूध उत्पादन घटा। ग्रामीणों का अनुभव है कि मौसमी ठंडक अब अनुपस्थित है। सोलर इंस्टॉलेशन पक्षियों के लिए घातक साबित हो रहे। पैनलों की चकाचौंध जलाशय जैसी लगती है, जिससे उड़ते पक्षी टकराते हैं। पिछले तिमाही वर्षों में बाड़मेर में सैकड़ों पक्षी गिद्ध व कठफोड़वा सहित मारे गए। तितलियों व मधुमक्खियों की आबादी 70 प्रतिशत घटी। आवास हानि व परागण चक्र बाधित हुआ। इससे खाद्य श्रृंखला प्रभावित हुई, जो समग्र जीवन चक्र को कमजोर कर रही है।

कृषि उत्पादन पर प्रत्यक्ष असर पड़ा है जो क्षेत्र खजूर व अनार के लिए जाना जाता था। सोलर प्लांट्स के बाद इनकी उपज 75 प्रतिशत लुढ़क गई। उच्च तापमान से फलन कमजोर, फूल झड़ना बढ़ा है। जल संकट गहराया है। स्थानीय किसान रामस्वरूप गुर्जर के शब्दों में, “वार्षिक 20 टन अनार अब 5 टन रह गया। कई बाग छोड़ दिए।” मिट्टी की नमी घटने से गुणवत्ता प्रभावित। ये बदलाव आजीविका संकट पैदा कर रहे।
स्पेन व अमेरिका के सोलर फार्म्स में समान मुद्दे देखे गए। भारत में समस्या भूमि उपयोग से जुड़ी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं: बंजर भूमि प्राथमिकता दें, पुनर्वनीकरण अनिवार्य करें। पक्षी-अनुकूल पैनल व मॉनिटरिंग सिस्टम लगाएँ। 2023 सोलर नीति में प्रावधान हैं, किंतु कार्यान्वयन कमजोर है। सांसद कैलाश चौधरी ने संसद में चर्चा कराई। किसानों को भरपाई सुनिश्चित करें।सौर ऊर्जा का महत्व अपरिहार्य है, मगर सतत विकास के बिना यह विपदा बन सकता है। संतुलित दृष्टिकोण से राजस्थान पर्यावरण व ऊर्जा दोनों बचा सकता है।
