■ गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संदेश

● नई दिल्ली
77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और भारत की लोकतांत्रिक यात्रा की सार्थक झलक प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि देश में ही नहीं बल्कि विश्व के कोने-कोने में बसे भारतीय पूरे उत्साह और गर्व के साथ गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी कर रहे हैं। यह अवसर हमें अतीत से सीख लेने, वर्तमान की उपलब्धियों को समझने और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर प्रदान करता है।
राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता आंदोलन का स्मरण करते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 ने भारत की दशा और दिशा दोनों को बदल दिया। आज़ादी के साथ ही भारत अपने भाग्य का स्वयं निर्माता बना। 26 जनवरी 1950 को संविधान के पूर्ण रूप से लागू होने के साथ भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ। लोकतंत्र की प्राचीन परंपरा वाले भारत ने डोमिनियन व्यवस्था से मुक्त होकर आधुनिक गणराज्य का स्वरूप ग्रहण किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान विश्व के सबसे बड़े गणतंत्र की मजबूत आधारशिला है। न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्यों ने हमारे गणराज्य को विशिष्ट पहचान दी है। संविधान निर्माताओं ने राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ आधार प्रदान किया और विविधताओं से भरे देश को एक सूत्र में पिरोया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि वर्ष 2021 से यह दिवस ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है, ताकि युवा पीढ़ी नेताजी की अदम्य देशभक्ति और साहस से प्रेरणा ले सके। ‘जय हिंद’ का उद्घोष आज भी राष्ट्रीय गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने नारी शक्ति की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महिलाएं पारंपरिक सीमाओं को पार कर हर क्षेत्र में देश की प्रगति का नेतृत्व कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी दस करोड़ से अधिक महिलाएं विकास को नई गति दे रही हैं। खेती, उद्योग, विज्ञान, अंतरिक्ष, सशस्त्र बल और खेल—हर क्षेत्र में महिलाओं की सशक्त उपस्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
खेल जगत का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने महिला क्रिकेट विश्व कप का उदाहरण देते हुए इसे भारतीय महिलाओं की प्रतिभा और आत्मविश्वास का प्रमाण बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिला प्रतिनिधित्व लगभग 46 प्रतिशत तक पहुंच चुका है और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को और मजबूत करेगा।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि नारी शक्ति की सक्रिय भागीदारी से भारत समानता, समावेशन और सशक्त लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।
