
● ठाणे
ठाणे पुलिस के मुस्कान ऑपरेशन ने एक बार फिर मानवीय संवेदना और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है। मानसिक रूप से दिव्यांग और वर्षों से गुमशुदा एक बालक को पुलिस ने खोजकर पूरे 17 साल बाद उसके माता-पिता से सुरक्षित मिलवाया, जिससे एक परिवार को अपना खोया हुआ सुकून वापस मिल सका।
जानकारी के अनुसार, 19 दिसंबर को करीब 17 वर्षीय यह बालक रेलवे प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर बिना किसी अभिभावक के भटकता मिला था। बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस ने उसे तत्काल बालगृह में संरक्षण में रखा। जांच में सामने आया कि बालक मानसिक रूप से दिव्यांग है और स्पष्ट रूप से बोल पाने में असमर्थ है।
सीमित जानकारी के बावजूद ठाणे पुलिस आयुक्तालय की अपराध शाखा की चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उसकी पहचान की कोशिशें तेज़ कर दीं। मुंब्रा और शील-डायघर क्षेत्रों में तलाश के साथ-साथ सभी थानों में गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाली गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
इसके बाद पुलिस ने सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और सोशल मीडिया का सहारा लिया। बच्चे की तस्वीर और विवरण व्यापक स्तर पर साझा किए गए। इसी प्रयास का सकारात्मक परिणाम सामने आया, जब 23 जनवरी को सोशल मीडिया के ज़रिए बच्चे की मां ने पुलिस से संपर्क किया।
दस्तावेजों की जांच के बाद बालक की पहचान मोहम्मद इमरान आलमगीर के रूप में हुई। वीडियो कॉल के दौरान बच्चे ने अपनी मां को पहचान लिया, जिसने पूरे मामले की पुष्टि कर दी।
सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद बाल कल्याण समिति के आदेश पर बच्चे को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। बेटे की सुरक्षित वापसी से परिवार भावुक हो उठा। ठाणे पुलिस की इस सराहनीय पहल की हर ओर प्रशंसा हो रही है।
ठाणे पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं कोई लापता या बेसहारा बच्चा दिखाई दे, तो तत्काल नजदीकी पुलिस थाने या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें, ताकि कोई भी बच्चा अपनों से दूर न रहे।
