■ शक्ति, संकल्प और स्वदेशी सामर्थ्य का विराट प्रदर्शन

● नई दिल्ली
गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कर्तव्य पथ पर सैन्य शक्ति के साथ तकनीकी और आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रतीक का संगम दिखाई दिया। ‘मेड इन भारत’ के सुरक्षा संसाधनों के साथ राफेल और सुखोई विमानों की गर्जना, आकाश में सटीक उड़ान भरते हेलीकॉप्टरों की संरचनाएं और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े प्रतीकात्मक फॉर्मेशन ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि भारत अब केवल सामर्थ्य नहीं, आत्मविश्वास के साथ अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है। 77वें गणतंत्र दिवस का मूल भाव ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्षों पुरानी विरासत पर केंद्रित रहा, जहां तीस झांकियों के माध्यम से स्वतंत्रता की चेतना और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया। भारतीय वायु सेना का समन्वित फ्लाईपास्ट इस आयोजन का भव्य शिखर बना, जिसमें लड़ाकू, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर एक साथ शक्ति, अनुशासन और तकनीकी संतुलन का संदेश दे रहे थे।
परेड के दौरान उन्नत हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन केवल शक्ति-प्रदर्शन नहीं, बल्कि रणनीतिक चेतावनी के रूप में भी देखा गया। ब्रह्मोस मिसाइल विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई थी। इसके साथ राफेल, सुखोई, आकाश मिसाइल प्रणाली और ड्रोन-रोधी हथियारों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि भारत की रक्षा तैयारी केवल वर्तमान के लिए नहीं, भविष्य की चुनौतियों के लिए भी पूरी तरह सक्षम है। यह दृश्य शत्रु शक्तियों के लिए एक स्पष्ट संकेत था कि भारत की सैन्य स्मृति और सामरिक सतर्कता दोनों मजबूत हैं।
स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का आत्मविश्वास भारतीय सेना द्वारा प्रदर्शित उच्च गतिशीलता टोही वाहन (एचएमआरवी) में भी दिखाई दिया। यह भारत का पहला स्वदेशी बख्तरबंद हल्का विशेषज्ञ वाहन है, जिसे महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स ने विकसित किया है। आधुनिक युद्धक्षेत्र निगरानी रडार, ड्रोन सपोर्ट, उन्नत संचार प्रणाली और ड्रोन-रोधी हथियारों से लैस यह वाहन कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हेलीकॉप्टरों से लेकर जमीनी गतिविधियों तक पर निगरानी रखने में सक्षम है। इसकी संरचना छोटी टुकड़ियों को तेज़ गति, सटीक रणनीति और प्रभावी आक्रमण की क्षमता प्रदान करती है।
जमीनी शक्ति के मोर्चे पर भी भारत का आत्मविश्वास पूरी भव्यता के साथ सामने आया। टी-90 भीष्म और अर्जुन एमके-1 जैसे मुख्य युद्धक टैंकों ने कर्तव्य पथ पर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया, जबकि नाग मिसाइल सिस्टम ट्रैक्ड एमके-2 ने मशीनीकृत सामर्थ्य को नई धार दी। विशेष बलों की टुकड़ियां अजयकेतु ऑल-टेरेन व्हीकल, रंध्वज रग्ड टेरेन टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और ध्वजांक लाइट स्ट्राइक व्हीकल के साथ आगे बढ़ीं, जिसने यह दर्शाया कि भारत अब त्वरित सामरिक गतिशीलता और आधुनिक युद्ध रणनीति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ चुका है।
कुल मिलाकर, यह गणतंत्र दिवस केवल परंपरा का उत्सव नहीं था बल्कि शक्ति, स्वदेशी तकनीक और राष्ट्रीय संकल्प का विराट घोष था, एक ऐसा संदेश, जो भारत के आत्मनिर्भर, सक्षम और सजग भविष्य की स्पष्ट झलक देता है।
