■ सात दिन में मांगी विस्तृत रिपोर्ट

● मुंबई
मुंबई शहर में उपकरप्राप्त और खतरनाक घोषित इमारतों के पुनर्विकास को लेकर प्रशासन ने एक अहम और राहतभरा कदम उठाया है। मुंबई इमारत दुरुस्ती व पुनर्रचना मंडल (एमबीआरआरबी) के अधीन आने वाली जर्जर इमारतों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए, निवासियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी के तहत संबंधित सभी विभागों के रेजिडेंट एक्जीक्यूटिव इंजीनियरों को सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
यह फैसला झोपड़पट्टी मोर्चा, मुंबई की ओर से मुख्यमंत्री को सौंपे गए निवेदन और विभिन्न नागरिक संगठनों से मिली शिकायतों के मद्देनज़र लिया गया है। 9 जनवरी 2026 को जारी आदेश के अनुसार, उन सभी पुनर्विकास परियोजनाओं की गहन समीक्षा की जाएगी, जो उच्च न्यायालय के स्थगन आदेशों या महाराष्ट्र गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास नियम 79(ए) को लेकर बनी अस्पष्टता के कारण लंबित पड़ी हैं।
प्रशासन द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में खतरनाक और उपकरप्राप्त इमारतों की मौजूदा स्थिति, अब तक जारी किए गए नोटिसों का विवरण, पुनर्विकास में हो रही देरी के कारण, निवासियों की जान-माल पर मंडरा रहे संभावित जोखिम और आगे की प्रशासनिक तथा नीतिगत कार्रवाई के सुझाव शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इन रिपोर्टों के आधार पर जर्जर इमारतों के पुनर्विकास को गति देने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस निर्णय लिए जाएंगे।
