- ठंडी की गलन खत्म, मार्च से तपन शुरू

● वाराणसी
उत्तर भारत में दिसंबर से जनवरी तक ठंड ने लोगों को खूब कंपकंपाया। कड़ाके की सर्दी के बाद फरवरी में मौसम ने थोड़ी नरमी दिखाई है, जिससे लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक यह राहत ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है। आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के भूभौतिकी विभाग के मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज कुमार श्रीवास्तव ने इसे लेकर अहम पूर्वानुमान जताया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि फिलहाल वसंत ऋतु का दौर चल रहा है और अगले दो से तीन सप्ताह तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इस दौरान सुबह-शाम हल्की ठंड बनी रहेगी, जबकि दोपहर में धूप कुछ तीखी महसूस होगी।
मौसम वैज्ञानिक के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह से मौसम पूरी तरह करवट लेगा और गर्मी के मौसम की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। मार्च की शुरुआत के साथ ही अधिकतम और न्यूनतम तापमान में तेजी से उछाल आने की संभावना है। इसके बाद तापमान बढ़ने का सिलसिला लगातार जारी रहेगा। अनुमान है कि मार्च के अंतिम सप्ताह तक उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
अप्रैल महीने में गर्मी और तेज होगी तथा अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की आशंका है। प्रोफेसर श्रीवास्तव के मुताबिक इस साल मई और जून में पिछले वर्ष की तुलना में अधिक गर्मी पड़ सकती है। इन महीनों में कई जिलों में तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर सकता है। वहीं न्यूनतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने की संभावना है, जिससे रातें भी गर्म बनी रहेंगी।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी सटीक पूर्वानुमान देना संभव नहीं है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां इस ओर इशारा कर रही हैं कि इस बार गर्मी लोगों की कड़ी परीक्षा लेने वाली है।
