
● सीतामढ़ी@बिहार
बथनाहा प्रखंड के एक साधारण ग्रामीण परिवार ने जीविका समूह से जुड़कर अपनी आजीविका की नई इबारत लिखी है। सीमित जमीन और सीमित संसाधनों के बावजूद सास–बहू की जोड़ी ने आधुनिक तकनीकों के सहारे फूलों की खेती का बीड़ा उठाया। शुरुआत में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन बाजार में फूलों की निरंतर मांग और समय पर बिक्री ने उनकी मेहनत को रंग दिखाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे आमदनी बढ़ी और घर की आर्थिक तंगी कम होती गई।
आज फूलों की खेती इस परिवार की आय का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। आसपास के गांवों में भी इस सफलता की चर्चा होने लगी है। केवल फूलों तक ही यह प्रयास सीमित नहीं रहा। सास–बहू ने खेत में लौकी, भिंडी, नेनुआ और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती भी शुरू की। इससे नियमित आय का स्रोत तैयार हुआ। घर की आवश्यकताएं पूरी होने लगीं और स्थानीय बाजार में सब्जियां बेचकर अतिरिक्त लाभ भी मिलने लगा।
आय के विविध स्रोतों ने परिवार को आर्थिक स्थिरता दी है और जोखिम को भी कम किया है। पारंपरिक खेती का कार्य भी परिवार मिलकर संभाल रहा है। इस परिवर्तन की धुरी बनीं परिवार की बहू रूबी देवी, जो जीविका से सक्रिय रूप से जुड़ी हैं और कम्युनिटी मोबिलाइजर (सीएम) के रूप में कार्य कर रही हैं। वह न केवल अपने घर की खेती और व्यवसाय को सशक्त बना रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी जीविका से जोड़ने का अभियान चला रही हैं।
रूबी देवी महिलाओं को बचत, ऋण, स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती हैं। उनके प्रयासों से कई महिलाएं खेती, पशुपालन और छोटे उद्यम की ओर अग्रसर हुई हैं।
सालाना चार से पांच लाख रुपये की आमदनी से बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की योजनाएं सुचारु रूप से पूरी हो रही हैं। यह सफलता दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग से ग्रामीण परिवार भी समृद्धि की राह पर आगे बढ़ सकते हैं। बथनाहा की यह सास–बहू अब केवल किसान नहीं, ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन चुकी हैं।
