- तकनीक के नए दौर पर उठे सवाल

● तिरुअनंतपुरम
तकनीक जहां मानव जीवन को सरल और सक्षम बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं केरल से सामने आया एक वायरल वीडियो इस प्रगति के बीच नया सवाल खड़ा कर रहा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित इस वीडियो में एक ह्यूमनॉइड रोबोट सड़क पर हाथ फैलाकर खड़ा दिखाई देता है, मानो भीख मांग रहा हो। यही दृश्य लोगों के लिए कौतूहल और चर्चा का विषय बन गया है।
कुछ वर्ष पहले तक इंसानों जैसे दिखने और व्यवहार करने वाले रोबोट केवल विज्ञान कथाओं का हिस्सा थे। आज वे वास्तविकता बन चुके हैं। ये रोबोट न केवल इंसानों की तरह चलते-फिरते हैं, बल्कि नृत्य और जटिल गतिविधियां भी कर सकते हैं। हाल ही में चीन के एक कार्यक्रम में रोबोटों के सामूहिक नृत्य ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया था। कई देशों में उद्योगों में रोबोट का उपयोग सामान्य हो चुका है, और चीन व अमेरिका जैसे देशों में सैन्य उपयोग पर भी विचार हो रहा है।
किन्तु केरल का यह मामला अलग है। यह रोबोट किसी मंच पर प्रदर्शन नहीं कर रहा, न ही किसी फैक्ट्री में कार्यरत है। वायरल क्लिप में लगभग तीन से चार फुट लंबा यह रोबोट सड़क पर चलता दिखाई देता है। अचानक वह मुड़कर पास खड़े एक ठेले वाले के सामने दोनों हाथ फैला देता है। यह दृश्य देखकर ठेले वाला भी क्षणभर के लिए असमंजस में पड़ जाता है, जबकि आसपास मौजूद लोग इसका वीडियो बनाते नजर आते हैं।
बताया जा रहा है कि यह वीडियो केरल के पलक्कड़ क्षेत्र का है और इसे ‘Woke Eminent’ नामक एक्स हैंडल से साझा किया गया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि रोबोट किस कंपनी का है और वह स्वचालित रूप से कार्य कर रहा था या रिमोट से नियंत्रित किया जा रहा था।
कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का अनुमान है कि यह चीन के Unitree G1 मॉडल जैसा दिखता है, जिसकी ऊंचाई लगभग 4.33 फीट और कीमत करीब 13,500 डॉलर (लगभग 12.5 लाख रुपये) बताई जाती है। यह एआई आधारित रोबोट घर के कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है, लगभग 35 किलोग्राम वजनी है और पूर्ण चार्ज पर दो घंटे तक काम कर सकता है।
वीडियो पर प्रतिक्रियाओं की भी बाढ़ आ गई है। किसी ने व्यंग्य किया कि अब रोबोट भी ‘प्रशिक्षण’ लेने लगे हैं, तो किसी ने सुझाव दिया कि इनसे सड़कों की सफाई कराई जा सकती है। एक अन्य टिप्पणी में आशंका जताई गई कि भविष्य में पारंपरिक रोजगार भी प्रभावित हो सकते हैं।
यह घटना तकनीक के बढ़ते दायरे के साथ-साथ उसके सामाजिक प्रभावों पर भी गंभीर विमर्श की आवश्यकता का संकेत देती है।
