
● लखनऊ
उत्तर प्रदेश में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से हो रहे हादसों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार से सवाल किया कि हर गंभीर दुर्घटना के बाद ही प्रशासन क्यों सक्रिय होता है, जबकि समय रहते प्रभावी कदम उठाकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि चाइनीज मांझे पर रोक को प्रभावी बनाने के लिए अब तक कौन-कौन से ठोस उपाय किए गए हैं। अदालत ने सरकारी अधिवक्ता को 11 मार्च तक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल औपचारिक प्रतिबंध पर्याप्त नहीं है। बच्चों, अभिभावकों और आम नागरिकों के बीच खतरनाक मांझे के दुष्परिणामों को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही इसके निर्माण, बिक्री और उपयोग पर कड़ाई से प्रतिबंध लागू करते हुए उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अदालत ने पीड़ितों को समुचित चिकित्सा सुविधा और मुआवजा देने के मुद्दे पर भी गंभीरता से विचार करने को कहा। न्यायालय ने निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट और प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर उसका सख्ती से पालन किया जाए।
यह आदेश अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा वर्ष 2018 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया, जिसमें प्रदेश में चाइनीज मांझे पर सख्त प्रतिबंध की मांग की गई थी।
