■ 64 मुमुक्षुओं का सामूहिक दीक्षा संस्कार

● मुंबई@बोरीवली
मुंबई ने रविवार को एक ऐसा दृश्य देखा, जो आधुनिक महानगरों में विरल ही दिखाई देता है। बोरीवली पश्चिम के चीकुवाड़ी मैदान में आयोजित ‘संयमरंग उत्सव’ के दौरान 64 मुमुक्षुओं ने सांसारिक बंधनों का त्याग कर जैन दीक्षा का कठोर और संयमित मार्ग अपनाया। हाल के वर्षों में यह शहर में हुआ सबसे बड़ा सामूहिक संन्यास समारोह माना जा रहा है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, आस्था, संयम और आध्यात्मिक साहस की सार्वजनिक अभिव्यक्ति थी।
सुबह होने से पहले ही श्रद्धालुओं का सैलाब चीकुवाड़ी की ओर उमड़ने लगा। तड़के 4 बजे से ही परिवार, बुजुर्ग, युवा और समाज के प्रमुख लोग मैदान में पहुंचने लगे थे। कुछ ही घंटों में पूरा मैदान खचाखच भर गया। अनुमानतः 50 हजार से अधिक लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। वातावरण में श्रद्धा, भावुकता और गर्व का अद्भुत संगम दिखाई दिया।
दीक्षा समारोह गच्छाधिपति आचार्य सोम सुंदर सूरीजी, आचार्य योगतिलक सूरीजी, आचार्य कुशलचंद्र सूरीजी और आचार्य पुण्यसुंदर सूरीजी सहित अनेक साधु-साध्वियों के सान्निध्य में संपन्न हुआ। जब दीक्षार्थियों ने संयम, अनुशासन और त्याग के व्रत स्वीकार किए, तो उपस्थित जनसमूह की मौन साधना स्वयं बोल उठी।
सुबह लगभग 9.30 बजे राजोहरण अर्पण की विधि के साथ “जैनम् जयति शासनम्” का उद्घोष पूरे मैदान में गूंज उठा। हजारों कंठों से निकली यह ध्वनि कई लोगों के लिए भावविभोर कर देने वाला क्षण थी। परिजनों की आंखों में अश्रु थे, किन्तु उनके विश्वास अडिग थे।
इन 64 दीक्षार्थियों में अध्यात्म परिवार से जुड़े युवा समाजसेवी ऋषभभाई और उनकी पत्नी सोनलबेन का संयुक्त संन्यास विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। युवावस्था में आजीवन ब्रह्मचर्य का संकल्प लेकर उन्होंने त्याग और प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश दिया।
करीब सात वर्ष पूर्व इसी मैदान में 44 दीक्षाएं हुई थीं। अब कुल संख्या 108 तक पहुंचने के साथ चीकुवाड़ी जैन समाज की सामूहिक स्मृति में एक पावन तीर्थस्थल बन गया है।
