
● नई दिल्ली
भारतीय वायुसेना ने राफेल लड़ाकू विमान की क्षमता और विश्वसनीयता पर एक बार फिर दृढ़ विश्वास जताया है। वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में राफेल की भूमिका को निर्णायक बताते हुए उसे अभियान का प्रमुख आधार बताया। उनके अनुसार जटिल परिस्थितियों में राफेल ने अपनी मारक क्षमता, तकनीकी श्रेष्ठता और त्वरित प्रतिक्रिया से अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए रणनीतिक बढ़त दिलाई।
वायुसेना अब भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपनी ताकत बढ़ाने की दिशा में सक्रिय है। 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (एमआरएफए) की खरीद प्रक्रिया को गति दी गई है। रक्षा खरीद बोर्ड से स्वीकृति के बाद यह सौदा देश के सबसे बड़े रक्षा अधिग्रहणों में शामिल हो सकता है। एयर मार्शल कपूर ने संकेत दिया कि अगली पीढ़ी के आधुनिक विमानों से वायुसेना की परिचालन क्षमता और सामरिक प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
फिलहाल वायुसेना के पास लगभग 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर उभरती सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह कमी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एमआरएफए योजना के तहत 114 विमानों में कुछ सीधे आयात किए जाएंगे, जबकि अधिकांश का निर्माण भारत में किया जाएगा। ‘मेक इन इंडिया’ के अनुरूप स्वदेशी उत्पादन और तकनीकी हस्तांतरण पर विशेष ध्यान रहेगा। राफेल को प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है, पर अंतिम निर्णय विस्तृत चयन प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा।
